सिद्धार्थनगर। ट्रैफिक में मामूली बात पर बहस, घरों में बढ़ती झुंझलाहट, रातभर करवटें बदलते लोग और दिन चढ़ते ही बिगड़ता मिजाज..., जिले में पड़ रही भीषण गर्मी अब सिर्फ शरीर नहीं, लोगों के व्यवहार और मानसिक संतुलन पर भी असर डालने लगी है।
पिछले कई दिनों से 41 से 43 डिग्री के बीच बरकरार तापमान और उमस भरी रातों ने लोगों की दिनचर्या के साथ स्वभाव भी बदलना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ मौसम का संकट नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती गर्मी धीरे-धीरे सामाजिक व्यवहार को भी बदल रही है। अधूरी नींद, शारीरिक थकान और मानसिक दबाव मिलकर लोगों को ज्यादा अस्थिर और आक्रामक बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में झुलसाती धूप और रात में बिजली कटौती के बीच लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही। इसका असर अगले दिन के व्यवहार में साफ दिख रहा है। बाजारों में छोटी-छोटी बातों पर बहस बढ़ रही है, सड़क पर धैर्य कम हो रहा है और दफ्तरों में मानसिक थकान महसूस की जा रही है। बाहर काम करने वाले मजदूर और रिक्शा चालक दोपहर तक थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करने लगते हैं।
अस्पतालों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। इन दिनों मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी-पीएचसी और निजी अस्पतालों में सिरदर्द, बेचैनी, अनिद्रा, घबराहट और कमजोरी की शिकायत लेकर आने वाले मरीज बढ़े हैं। फिजिशियन डॉ. गौरव दुबे बताते हैं कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी भी मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है। पहले से तनाव, माइग्रेन या मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। पुलिस के पास भी इसके साइड इफेक्ट देखने को मिल रहे हैं। मामूली बात पर मारपीट के मामलों की इधर एक हफ्ते से काफी शिकायतें बढ़ी हैं।
डॉक्टरों के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस के बाद शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करने लगता है। इससे दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई लोगों में “ब्रेन फॉग” जैसी स्थिति दिखती है, जहां ध्यान केंद्रित करने और सामान्य प्रतिक्रिया देने में परेशानी होती है।