सिद्धार्थनगर। यदि कोई एचआईवी संक्रमण है तो उन्हें छिपाने नहीं बल्कि बताने की आवश्यकता है ताकि सही समय पर इलाज शुरू हो सके और उसकी सेहत पर वायरस लोड बढ़ने का नुकसान न हो और वह अधिक समय तक जिंदगी जी सके।
संक्रमण के बारे परिवार और समाज को नहीं बताना है, बल्कि सरकारी अस्पताल में जाना है, जिंदगी की राह आसान हो जाएगी। ऐसी ही सफलता की कहानी है इटवा क्षेत्र में जन्म लेने वाली एक महिला की। वह 21 साल पहले एचआईवी संक्रमित हुई और अब दिल्ली में उसका भरा पूरा परिवार है।
साल 2003 में टीबी मरीज और हाई स्कूल की छात्रा की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई तो काउंसलिंग के दौरान उसने स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि आप मुझे दवा न दो, मैं जान दे दूंगी। मैं जी कर क्या करूंगी और मुझसे कोई शादी नहीं करेगा और मैं अपनी बीमारी छिपाकर किसी लड़के को धोखा नहीं दूंगी।
उसके बाद उसे एचआईवी पॉजिटिव लोगों के खुशहाल जीवन जीने की सफलता की तमाम कहानियां सुनाई गई। दवा हुआ तो उसने टीबी से जंग जीत ली और धीरे-धीरे इंटर की डिग्री भी हासिल की। एचआईवी फेमिली के शादी के एप पर उसकी फोटो और बॉयोडेटा डाला गया तो दिल्ली के एक एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति ने शादी करने का प्रस्ताव दिया।
रिश्ता पसंद आया तो सिद्धार्थनगर में दोनों ने कोर्ट मैरिज की। उन दोनों से एक बच्चा पैदा हुआ, एचआईवी निगेटिव है। वह दो माह पहले सिद्धार्थनगर आई थी और उन स्वास्थ्य कर्मियों को मिठाई खिलाने पहुंची, जिन्होंने उसे खुशी की जिंदगी की डगर पर चलने का हौसला दिया था। आईसीटीसी के काउंसलर राजमणि मिश्र बताते हैं कि कई ऐसे एचआईवी पॉजिटिव हैं, जो 1-20 साल से दवा ले रहे हैं। रोजगार भी कर रहे हैं, अपना परिवार आगे बढ़ा रहे हैं। खुशहाल जीवन जी रहे हैं, उनकी तबीयत गंभीर हो जाती है, जो लोग संक्रमण छिपाते हैं। एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं के बच्चे निगेटिव हो रहे हैं, क्योंकि दवाइयों के साथ मां की अच्छी सेहत और सकारात्मक सोच का सुझाव दिया जाता है।