जिला पंचायत सदस्यों के साथ लगाए गए गनर
सपा के जिला पंचायत सदस्यों ने प्रशासन पर लगाए आरोप
सभी 45 जिला पंचायत सदस्यों को उपलब्ध कराए गए सुरक्षाकर्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। चुनावी अधिसूचना जारी होते ही विपक्षी समेत जिले के सभी 45 जिला पंचायत सदस्यों को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जाने से मामला गरम हो गया है। इससे नाराज सपा नेताओं और जिला पंचायत सदस्यों ने प्रशासन पर सुरक्षाकर्मी उपलब्ध करा सदस्यों पर नजर रखे जाने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के लिहाज से सुरक्षा के लिए पहल की गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है, जिसके तहत 26 जून को नामांकन और तीन जुलाई को मतदान एवं मतगणना होगी। इसके साथ ही सभी सदस्यों को दो-दो सुरक्षाकर्मी मुहैया करा दिए गए हैं। जिसके बाद सदस्यों में तरह-तरह की कयासबाजी शुरू हो गई है। एक निर्दल सदस्य का कहना है कि उसके मोबाइल पर फोन आया कि सुरक्षाकर्मी चाहिए, जिसके बाद उसे गनर उपलब्ध कराया गया। सपा की जिला पंचायत सदस्य अनीता द्विवेदी का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है और उन्होंने प्रशासन से सुरक्षाकर्मी की मांग नहीं की थी, इसके बावजूद उन्हें सुरक्षाकर्मी मुहैया कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव का कहना है कि सुरक्षाकर्मी लगाने के बहाने सदस्यों से मिलने-जुलने वालों पर नजर रखी जाएगी साथ ही विपक्षी एवं निर्दल सदस्यों पर दबाव बनाने के लिए भी ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक कभी भी जिला पंचायत सदस्यों को गनर नहीं मिलता था। यह सरकार सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी स्तर पर जाने को तैयार है।
सपा सदस्य ने लौटाया सुरक्षाकर्मी
सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव का कहना है कि सदस्यों पर सुरक्षाकर्मियों को जबरियां थोपा जा रहा है। बांसी क्षेत्र के सपा के जिला पंचायत सदस्य अमित निषाद ने प्रशासन को लिखित पत्र देकर सुरक्षाकर्मियों को अपने घर में जगह नहीं होने का हवाला देकर लौटा दिया है। उन्होंने बताया कि सपा के अन्य सदस्य भी सुरक्षाकर्मियों से असहज महसूस कर रहे हैं और उन्हें वापस करने की गुहार लगा रहे हैं।
सदस्यों की सुरक्षा के लिए लगाया गनर
एसपी रामअभिलाष त्रिपाठी ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव में निर्वाचित सदस्यों को चुनावी रंजिश के कारण संभावित खतरा देखते हुए सुरक्षाकर्मी लगाए जा रहे हैं। जो सदस्य सुरक्षा की मांग कर रहे हैं उन्हें ही सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, किसी के पास जबरियां सुरक्षाकर्मी नहीं लगाए जा रहे हैं।