फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: संत के पास कहां से पहुंचा अवैध तमंचा

विज्ञापन
शिवनगर डिंडई क्षेत्र के ग्राम पंचायत धौरहरा स्थित आम चांदी बाघेश्वरी धाम मंदिर में पसरा सन्नाटा
विज्ञापन
-पुजारी आत्महत्या कांड : देसी पिस्तौल से सुसाइड की बात आ रही सामने
विज्ञापन


-कहां से पुजारी के पास पहुंच देसी तमंचा, चर्चा कर रहे लोग
-क्या थी परेशानी, क्यों उठाया आत्मघाती कदम, यह भी बड़ा सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। आम चांदी बाघेश्वरी धाम मंदिर के पुजारी की आत्महत्या में प्रयोग तमंचा कहां से आया और कैसे उन तक पहुंचा। यह सवाल गूंजने लगा है। हर कोई तमंचे पर चर्चा कर रहा है कि संत तक के पास असलहा किसने पहुंचा दिया। साथ ही आत्महत्या करने के पीछे विवशता क्या थी। इन पहलुओं की जांच जा रही है। क्योंकि इतना बड़ा कदम उठने के पीछे बड़ी वजह जरूर रही होगी। कोई ऐसी बात थी, जो पुजारी को कमरा बंद करके खुद को गोली से उड़ाया वह भी अवैध तमंचे से।
तमंचा कनेक्शन मिलने के बाद हर सवालाें को जवाब मिल जाएगा किआत्महत्या के लिए पुजारी क्यों विवश हो गए। पुलिस की अलग- अलग टीम मामले की जांच में लगी है। वहीं, दूसरे दिन भी प्रशासन की टीम मंदिर पर जमीं रही। घटना के दिन भी वह मंदिर पर मौजूद रहे। अपराह्न 2:00 बजे तक लोग मंदिर परिसर में महंत सरयू दास के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे।
विज्ञापन

-
यहां से हुई थी जिले में एंट्री
पुजारी की मौत के बाद मंदिर के अलावा आसपास लोग चर्चा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में धौरहरा गांव के बगल शुरुवार गांव में राजू दास अपने चेलों के साथ चित्रकूट से कथा कहने आए थे। इसी दौरान उनसे गांव के लोगों ने उनसे बागेश्वरी धाम मंदिर पर चर्चा की और बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है। लेकिन किसी पुजारी के न होने से यह मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया है। इस पर उन्होंने अपनी सहमति जताते हुए जल्द आने की बात कही। वर्ष 2017 में राजू दास लौट और बागेश्वरी धाम मंदिर पहुंचे। जहां कंटीली झाड़ियों से मंदिर घिरा था। ग्रामीणों की मदद से मंदिर के बगल पन्नी डालकर कुटिया बना ली और मंदिर की साफ सफाई करने बाद पूजा पाठ शुरू कर दी। यह देख क्षेत्र के लोग सहयोग के लिए आए और उसके बाद उन्होंने ने मंदिर के बगल पीतांबरी माता और बंगलामुखी माता मंदिर का निर्माण कराया। पीतांबरी माता की मूर्ति की स्थापना कर दी, जिससे उनका पूजा पाठ शुरू हो गया। जबकि बंगलामुखी मंदिर बनकर तैयार है। मूर्ति भी लाकर रखी थी केवल स्थापना करना बाकी था।
विज्ञापन

-
कहीं जमींन के लिए तो नहीं शुरू हुआ दबाव
पुजारी की आत्महत्या के मामले में संपत्ति और मंदिर पर काबिज होने के लिए उन पर मानसिक दबाव बनाए जाने की बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कारण ग्राम पंचायत धौरहरा द्वारा गांव के खाली पड़े 12 बीघा जमीन को लगभग तीन साल पहले प्रस्ताव बनाकर मंदिर के नाम दे दिया गया। जो आज के समय में बड़ी संपत्ति है। साथ ही उसी भूमि पर पर पर्यटन विभाग की ओर से स्वीकृति प्रदान करते हुए भवन निर्माण का कार्य भी चल रहा है। ऐसे में आने वाले दिन में जहां बड़ा धार्मिक स्थल के रूप में यह मंदिर विकसित होता, वहीं आमदनी भी बढ़ने की उम्मीद थी। ऐसे में कहीं न कहीं आत्महत्या में यह कारण हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। राजू दास दो सेवादार साथ रखते थे। एक चित्रकूट का रहने वाला था, जबकि दूसरा आसपास के किसी गांव का। पूजा-पाठ चित्रकूट का सेवादार ही करता था।। उसकी गैर मौजूदगी में दूसरा सेवादार करता था।
-
बोले जिम्मेदार
आत्महत्या प्रकरण में मामले की जांच की जा रही है। हर पहलुओं की जांच की जा रही है। तमंचा के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
-प्रशांत कुमार प्रसाद, एएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें