सिद्धार्थनगर। नई उम्मीदें, नई आस, नया जोश और नए उत्साह के साथ नव वर्ष का आगमन हो गया है। नए वर्ष के स्वागत के सबके अपने ढंग हैं और अपने तौर-तरीके हैं। देर रात के बाद से ही हर कोई नए साल के जश्न में डूब गया है। बेशक, यह जश्न मनाने का मौका है। हंसिए, गाइए, दिल खोलकर खुशियां मनाइए। मगर यह अवसर सिर्फ खुशियां मनाने का ही नहीं है। एक नया संकल्प लेने का भी है। संकल्प, समाज और राष्ट्र निर्माण का। जाति-धर्म के झगड़ों और आपसी फूट ने बीते साल में कई दर्द दिए। लोगों के दिलों में दूरियां बनाईं।
बीते साल जो भी गिले-शिकवे रहे, अब उन्हें भुलाकर एक नई शुरुआत करने की जरूरत है। नकारात्मकता के आवरण को छोड़कर सकारात्मक सोच के साथ समाज से जुड़ने और अपनी अहमियत बताने की आवश्यकता है। आज हम यह प्रण लें कि पुरानी बातों को भुलाकर नई सुबह से नई शुरुआत करेंगे। नए लक्ष्य के लिए आगे बढ़ेंगे। विकास के जो मापदंड किन्हीं कारणों से इस वर्ष पूरे नहीं हो पाए, उसे पाने के लिए अपना सर्वस्व लगा देंगे तो नया साल सही मायने में हम सबके लिए कुछ नया होगा।