बड़ों पर मेहरबानी, छोटों पर फूटा ठीकरा
फर्जी शिक्षक प्रकरण में अब तक नहीं हो सकी एक भी बीएसए की जांच
लिपिकों के नाम पर जांच कर टीम बचा रही है अधिकारियों की गर्दन
पांच बीएसए और कई लिपिकों के नाम और आए थे सामने
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा मंत्री के जिले में फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद जांच का क्रम धीमा पड़ गया है। अब तक एसटीएफ और पुलिस विभाग की टीमें केवल प्यादों तक ही पहुंच पाई है। जबकि इस मामले में पांच बीएसए के नाम सामने आए थे, जिनके समय में फर्जी नियुक्ति का खेल खेला गया था। लेकिन न जाने कौन सी मजबूरी है कि बड़े लोगों पर न तो विभाग हाथ डाल पा रहा है और न ही जांच एजेंसियां। ऐसे में अब सवाल उठने शुरू हो गए है कि बड़ों पर एजेंसियां मेहरबान और छोटों प्यादों को गिरफ्तार कर कोरम पूरा कर रही हैं।
जिले में फर्जीवाड़े की कहानी रुक नहीं रही है। अब तक 101 फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी हो चुकी है। दो लिपिकों समेत आठ ऐसे लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जो फर्जी शिक्षकों के गिरोह से जुड़े हैं। खास बात यह है कि बर्खास्त शिक्षकों में सबसे अधिक देवरिया के कुइंचवर गांव के रहने वाले हैं। इसी गांव के राकेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद लिपिक धर्मेंद्र सिंह और बीएसए के स्टेनो रहे हरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से यह बात सामने आई कि करीब 400 से अधिक शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर जिले में नौकरी कर रहे हैं। इनको संरक्षण देने का काम शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी कर रहे हैं। इसकी वजह से उन तक एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां पहुंच नहीं पा रही हैं।
इन बीएसए के नाम आए थे सामने
फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद चार बीएसए के नाम सामने आए थे। बताया जाता है कि इन्हीं बीएसए के कार्यकाल में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इनमें बीएसए अजय सिंह, मनीराम सिंह, अरविंद पाठक, कौशल किशोर शामिल थे। जांच कर रहे सीओ कैंट गोरखपुर सुमित शुक्ला ने बताया कि तीन बीएसए को जांच के लिए बुलाया गया था। इनमें फिरोजाबाद से अरविंद पाठक, गोंडा से मनीराम सिंह और गोरखपुर में वर्तमान बीएसए बीएन सिंह को बुलाया गया था। एसटीएफ भी मामले की जांच में जुटी है।
तीन नाम एसटीएफ की रडार पर
फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद तीन और नाम एसटीएफ की रडार पर है। इनमें देवरिया, प्रतापगढ़ के लोग शामिल है। सूत्रों की माने तो इन पर पुलिस और एसटीएफ दोनों की नजर है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगर इनकी गिरफ्तारी होती है, तो कई सफेदपोश और बड़े चेहरे उजागर होंगे। क्योंकि ये लोग फर्जी शिक्षकों के सरगना से जुड़े हैं। इनकी गिरफ्तारी से प्रदेश स्तर के कई लोग बेनकाब हो सकते है।
बिना शह के नियुक्ति संभव नहीं
अब तक जितने भी फर्जी शिक्षक पकड़े गए है। उनमें से कइयों के संबंध राजनीतिक लोगों से रहे हैं। देवरिया के एक सत्ता पक्ष के नेता का नाम भी उस वक्त उछला था। कई संस्थाओं के लेटर पैड भी लगे थे। लेकिन उन तक टीम पहुंच नहीं पाई। इस बीच यह बात छनकर सामने आई कि बिना बड़े अधिकारियों की शह पर नियुक्ति देना संभव नहीं है।