चार सहायक अभियंता तलब
राज्य सूचना आयोग ने सभी को बुलाया
फर्जी प्रपत्रों पर भुगतान के मामले में मांगी जानकारी
आरटीआई में ड्रेनेज खंड के कारनामों का खुुलासा
निविदा स्वीकृति से पहले ही दे दिया घोषणा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी ने ड्रेनेज खंड कार्यालय के फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। निविदा स्वीकृति से पहले ही ठेकेदारों की ओर से घोषणा पत्र देने का मामला प्रकाश में आया है। फर्जी प्रपत्रों का मामला संज्ञान में आने पर राज्य सूचना आयोग ने चार सहायक अभियंताओं को तलब किया है। जबकि अधिशासी अभियंता को संपूर्ण सूचना देने के लिए निर्देश दिया है।
मुख्यालय के भीमापार निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता देवेश मणि त्रिपाठी ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत ड्रेनेज खंड से बंधों पर कराए गए कार्यों के भुगतान से संबंधित सूचनाएं मांगी थी। विभाग के जिम्मेदारों की ओर से दी गई सूचना में स्पष्ट हुआ कि कार्यों से संबंधित निविदा अथवा कोटेशन किसी समाचार पत्र में निकाला ही नहीं गया। इतना ही नहीं समय-समय पर चार सहायक अभियंताओं की ओर से प्राप्त कराई गई सूचना भी गुमराह करने के साथ ही प्रपत्रों में फर्जीवाड़ा करने का मामला प्रकाश में आया। सूचना आयोग के कड़े रुख के कारण स्टांप पेपर दे पाना संभव नहीं था। लिहाजा विभागीय जिम्मेदारों ने घोषणा पत्र होने का लिखित रूप से जिक्र किया। वह भी निविदा तिथि के पूर्व की घोषणा पत्र थी। ऐसे में फर्जीवाड़ा स्पष्ट है। आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक बीते 17 फरवरी को सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने ड्रेनेज खंड के चार सहायक अभियंताओं को गलत सूचना देने के लिए तलब किया है। जबकि अधिशासी अभियंता को सही तथ्यों के आधार पर संपूर्ण सूचना देने के लिए निर्देश दिया है। अधूरी सूचना पर दंडित करने की चेतावनी भी दी है।