घुघली-महराजगंज-आनंदनगर रेल परियोजना में सरकारी जमीन के पेड़ बने बाधा
महराजगंज।
घुघली-महराजगंज-आनंदनगर प्रस्तावित रेल मार्ग के निर्माण में पेड़ बाधा बन गए हैं। प्रस्तावित मार्ग में सरकारी जमीनों पर खड़े पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। निजी जमीनों पर सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जहां निर्माण में कोई बाधा नहीं है, वहीं सरकारी भूमि पर मौजूद 32 पेड़ों की अनुमति लंबित रहने से संबंधित हिस्सों में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
रेलवे के अनुसार जिले में 24.8 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण होना है। इसके तहत जोगिया से सवना तक 23 गांव चिह्नित किए गए हैं। परियोजना के दायरे में आने वाली निजी जमीनों पर कुल 895 पेड़ पहले ही चिह्नित किए गए थे। मुआवजा भुगतान के बाद किसानों की सहमति से इन सभी पेड़ों की कटाई पूरी कर ली गई है, जिससे निजी भूमि वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है।
सरकारी जमीन पर अटका मामला : असल अड़चन सरकारी जमीनों पर मौजूद पेड़ों को लेकर है। परियोजना क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कुल 88 पेड़ चिह्नित किए गए थे। इनकी कटाई के लिए रेलवे विभाग ने प्रभागीय वनाधिकारी, सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग को एनओसी के लिए आवेदन भेजा। नियमों के तहत प्रति पेड़ निर्धारित शुल्क भी जमा करा दिया गया है।
अब तक 56 पेड़ों की अनुमति मिलने के बाद उनकी कटाई कर ली गई है, लेकिन पिपरदेउरा और महुअवा गांव क्षेत्र में स्थित शेष 32 पेड़ों के लिए अभी एनओसी जारी नहीं हो सकी है। निर्माण एजेंसियों का कहना है कि इन पेड़ों के कारण संबंधित हिस्सों में रेल लाइन का कार्य रुका हुआ है।
रेल परियोजना से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित गुप्ता और पिंटू देबनाथ के अनुसार यदि समय रहते अनुमति नहीं मिली तो परियोजना की निर्धारित समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।
किसानों की भूमि पर नहीं है बाधा :
रेल लाइन निर्माण के दायरे में आने वाले जोगिया, घघरुआ खड़ेसर, पिपरा मुंडेरी, रामपुर बल्डिहा, घुघुली खुर्द, मटकोपा, बरवा चमैनिया, धरमपुर, पिपराइच उर्फ पचरुखिया, पड़री बुजुर्ग, लक्ष्मीपुर, विशुनपुर गबड़ुआ, सिसवा बाबू, शिकारपुर, रामपुर, कोदइला, बांसपार बैजौली, बरवा विद्यापति, तरकुलवा, अगया, पिपरदेउरा और सवना गांवों में किसानों की जमीन पर मौजूद सभी पेड़ों की कटाई पहले ही पूरी हो चुकी है।
परिसंपत्तियों पर भी कार्रवाई जारी :
परियोजना के तहत कुल 52 परिसंपत्तियां प्रभावित हो रही हैं। रेलवे विभाग के अनुसार आवासीय मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है और प्रभावित मकान मालिकों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है, ताकि निर्माण में आगे कोई बाधा न आए।
मुआवजा वितरण की स्थिति
- किसानों को अब तक 5,58,13,02,359 रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है।
- 71,39,71,067 रुपये का भुगतान अभी शेष है।
- परिसंपत्तियों से प्रभावित मकान मालिकों को 11,88,89,935 रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि 1,03,56,390 रुपये का भुगतान बाकी है।
अधिकारी बोले-
सरकारी जमीनों पर मौजूद पेड़ों की कटाई के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर शुल्क जमा कराया जा चुका है। अनुमति मिलते ही परियोजना के कार्य में तेजी लाई जाएगी।
-पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे
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वन विभाग की ओर से कोई अनावश्यक देरी नहीं की जा रही है। प्रक्रिया के तहत जल्द ही एनओसी जारी कर दी जाएगी।
-निरंजन सुर्वे, प्रभागीय वनाधिकारी, सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग