सिद्धार्थनगर। जिले में हर वर्ष बाढ़ और डूबने की घटनाओं की आशंका को देखते हुए युवाओं और अभिभावकों का रुझान तैराकी सीखने की ओर तेजी से बढ़ा है। जिला स्टेडियम के तरणताल में इन दिनों रोजाना करीब 100 बच्चे प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। फिलहाल बड़े स्विमिंग पूल की फिल्टर मशीन खराब होने के कारण प्रशिक्षण छोटे पूल में कराया जा रहा है।
जिले में नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों की संख्या अधिक होने के कारण बरसात के मौसम में डूबने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसे देखते हुए अभिभावक बच्चों को तैराकी सिखाने के लिए जिला स्टेडियम भेज रहे हैं। स्टेडियम के छोटे तरणताल में ट्यूबवेल के पानी से पूल भरकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पानी की सफाई के लिए सुपर सक्शन मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
स्टेडियम में सुबह छह से सात बजे तक बालिकाओं और सात से आठ बजे तक बालकों का प्रशिक्षण होता है। वहीं शाम चार से पांच बजे तक बालिकाओं तथा पांच से छह बजे तक बालकों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। प्रशिक्षकों की निगरानी में बच्चों को तैराकी के साथ पानी में सुरक्षित रहने और बचाव के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।
इन दिनों अभिषेक मिश्रा, आर्यन, प्रतीक त्रिपाठी और आराध्या त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में बच्चे नियमित रूप से प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। प्रशिक्षकों का कहना है कि इस बार पहले की तुलना में नामांकन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है और बच्चों के साथ अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है।
बड़े स्विमिंग पूल की फिल्टर मशीन खराब है, इसलिए फिलहाल छोटे तरणताल में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। करीब 100 बच्चों का नामांकन हो चुका है। ट्यूबवेल से पानी भरकर सुपर सक्शन मशीन से उसकी सफाई की जाती है। हमारा प्रयास है कि बच्चे तैराकी के साथ जल सुरक्षा के गुर भी सीखें।
- सत्यप्रकाश त्रिपाठी, जीवन रक्षक, प्रशिक्षक
फैक्ट बॉक्स
- बड़े स्विमिंग पूल की फिल्टर मशीन खराब
- छोटे तरणताल में जारी है प्रशिक्षण
- करीब 100 बच्चों का नामांकन
- सुबह व शाम अलग-अलग बैच
- बालिकाओं और बालकों के लिए अलग समय
- ट्यूबवेल के पानी और सुपर सक्शन मशीन से पूल की सफाई