सिद्धार्थनगर। बरसात के मौसम में चूहा और छछूंदर के परजीवी सूक्ष्म कीटों के काटने के कारण बच्चे स्क्रब टाइफस बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मौसम में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है ताकि बच्चों को बचाया जा सके। एईएस के अंतर्गत छह प्रकार की बुखार की जांच में सबसे अधिक स्क्रब टाइफस के सात केस मिले हैं, जबकि चार बच्चे जेई की चपेट में आए हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी सहित पीआईसीयू और निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी के 100 मरीजों में 30 से 35 बच्चे बुखार पीड़ित मिल रहे हैं। हाई ग्रेड बुखार में जब 102 डिग्री से अधिक हो जाता है तो एईएस के अंतर्गत छह प्रकार की जांच की जाती है। जांच रिपोर्ट के अंतर्गत इलाज होता है तो जल्द ही आराम मिलता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि तेज बुखार के साथ झटका आने पर मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार दवा दी जाती है, जल्द ही आराम मिल जाता है।
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महामारी रोग विशेषज्ञ समीर सिंह ने बताया कि बरसात में स्क्रब टाइफस के सात केस मिले हैं,जबकि बर्डपुर, खुनियाव, जोगिया व बढ़नी में चार बच्चो में जेई वायरस की पुष्टि हुई है। जिले में डेंगू के सात केस मिले हैं, वे सभी सिद्धार्थनगर के रहने वाले हैं और बाहर रहते हैं। मलेरिया के सात केस हैं।
बुखार के बारे में जानिए
सात दिन के इंदर का बुखार हो, हाव भाव बदल जाए, झटका आए या न आए तो जेई का लक्षण है। इस संक्रमण मच्छर के काटने से होता है। डेंगू में तेज बुखार, उल्टी, सिर व पैर दर्द के साथ दाने निकल जाते हैं, गंभीर स्थिति में मुंह से रक्तस्राव भी हो सकता है, जबकि इन सभी लक्षणों के साथ जोड़ों में दर्द हो तो चिकनगुनिया हो सकता है। स्क्रब टाइफस में परजीवी कीट काटते हैं तो लोग बीमार हो जाते हैं, जबकि लेप्टो स्पायरोसिस में चार पैर वाले अन्य जानवरों के परजीवी कीट एवं उनमें मूत्र में रहने वाले कीटों के काटने के कारण होता है। इसी कारण कहा जाता है कि घर और घारी अलग अलग स्थान पर होना चाहिए। मलेरिया में तेज बुखार होता है, नीयत समय पर बुखार आता है। ठंड लगता है और जब पसीना अधिक होता है तो बुखार उतर जाता है।