कपिलवस्तु यानी शाक्य गणराज्य के राजा शुद्धोधन की राजधानी। वहीं शुद्धोधन जिनके पुत्र सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अल्पायु में राजसी वैभव और सांसारिक मोह का त्याग कर दिया था।
12 वर्षों की तपस्या के बाद दुनिया को सत्य, अहिंसा, दया, करुणा और प्रेम का महोत्सव बताया और महात्मा बुद्ध बन गए। दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयायियों के लिए बुद्ध की यह धरा किसी तीर्थ से कम नहीं है।
बौद्ध धर्म को मानने वाला हर कोई कम से कम एक बार इस जगह तक आना चाहता है। मगर हालात इतने अनुकूल नहीं है कि पर्यटक यहां खिंचे चले आएं। सिद्धार्थ की राजधानी होने के पुख्ता प्रमाण मिलने के दशकों बाद भी यह स्थान निर्जन और वीरान पड़ा है।
पर्यटक सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले पर्यटक मायूस लौट रहे हैं। राजनीतिक और सामाजिक पिछड़ेपन की स्थिति देख उन्हें यकीन ही नहीं होता कि यह वही भूमि है, जिसने सिद्धार्थ को बुद्ध बनने की राह पर चलाया। कपिलवस्तु महोत्सव की तैयारियों के दौरान आप लोगों के बीच से इलाके की तरक्की का सवाल उठने लगा है।
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में विकास और सुधार के ठोस काम होने चाहिए, ताकि पर्यटक स्थल के रूप में इलाके की पहचान को और प्रचार मिल सके। मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर नेपाल सीमा पर स्थित पिपरहवा ही वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध ने जीवन के शुरुआती 29 साल बिताए।
यहीं उनका लालन-पालन हुआ। इसी आंगन में वह खेले और यहीं जवान हुए। सिद्धार्थ के रूप में जीवन का लंबा समय यहां बिताने के तमाम प्रमाण खुदाई में मिले पुरातत्व अवशेषों से हो चुके हैं। इसमें पिपरहवा में स्थित मुख्य स्तूप भी है, जिसके नीचे बुद्ध के अवशेष रखे गए थे।
वर्ष 1898 में ब्रिटिश अधिकारी डब्लू स्मिथ पेपे ने ही यहां बुद्ध का अस्थि कलश होने की पुष्टि कर दी थी, जो 1971 के बाद हुई खुदाई से और पुख्ता भी हो गया। पुरातत्व विभाग ने इस पूरे क्षेत्र को संरक्षित घोषित कर दिया है। पर्यटन की दृष्टि से इस क्षेत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना गया, मगर दशकों बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं है।
बुद्ध की धरा आज भी उपेक्षित और सुविधा विहीन बनी हुई है। यहां न तो अच्छी सड़कें और न ही रहन-सहन का उचित प्रबंध। ऐसे में यहां पर्यटक कैसे आएंगे।
डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यह सही है कि कपिलवस्तु का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है, मगर यह मामला शासन स्तर का है। बुनियादी सुविधाएं पर्यटकों के लिए जरूरी है। केंद्रीय पर्यटन विभाग के संग्रहालय और प्रसाधन केंद्र बनकर तैयार है। यह भी शीघ्र चालू हो जाएंगे। विवि शुरू हो चुका है। इन सुविधाओं से यहां चहल-पहल बढ़ने की उम्मीद है।