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खाद की बढ़ती तस्करी किसानों के लिए संकट

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खाद की बढ़ती तस्करी किसानों के लिए संकट
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सीमा पर यूरिया और डीएपी की तस्करी बढ़ी
पिछले एक पखवाड़े में पकड़ी जा चुकी है 250 क्विंटल से अधिक खाद
एसएसबी के साथ ही स्थानीय पुलिस भी कर चुकी है कार्रवाई
सीमा पार खाद जाने से धान के समय उत्पन्न हुआ था संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सीमा पर यूरिया और डीएपी खाद की तस्करी बढ़ गई है। पिछले पखवाड़े के बीच तस्करी तेज हो गई है। इस दौरान 250 से अधिक क्विंटल खाद सीमा पार ले जाने की कोशिश करते समय एसएसबी और सीमावर्ती थानों की पुलिस द्वारा पकड़ी जा चुकी है। अगर इसी प्रकार से खाद की तस्करी हुई तो किसानों को खाद के संकट जूझना पड़ेगा।
भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली है। यहां बिना रोक-टोक के लोग इस पार से उस पार आते-जाते हैं। इस सुविधा का दुरुपयोग तस्कर करते चले आ रहे हैं। ये भारत और नेपाल में डिमांड और वस्तु की कमी के हिसाब से तस्करी करते हैं। मौजूदा समय में सीमा पर यूरिया और डीएपी खाद की तस्करी बढ़ी है। सुबह और शाम ढलते ही तस्कर खाद सीमा पार ले जाने का काम शुरू कर देते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक पखवाड़े में एसएसबी और पुलिस अब तक 250 क्विंटल से अधिक खाद सीमापार ले जाने की कोशिश करते हुए पकड़ चुकी है। इसी बीच पुलिस की स्वाट विंग ने एक सप्ताह पूर्व सीमा पार ले जाने की कोशिश करते हुए एक व्यक्ति को 40 बोरी खाद के साथ पकड़ा था। एसएसबी के जवानों की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बावजूद तस्करी का न रुकना किसानों के लिए चिंता विषय बन चुका है। कारण जब तक सिंचाई करके खाद डालने की जरूरत पड़ेगी तब तक दुकानों से खाद गायब हो चुकी होगी। इसके लिए किसानों को परेशान होना पड़ेगा। एसपी राम अभिलाष त्रिपाठी ने बताया कि सीमावर्ती थानों की पुलिस और सीमा पर तैनात सुरक्षा में लगे जवान लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। जांच अभियान जारी रहेगा और इस प्रकार के लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी चंदप्रकाश सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के खाद विक्रेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। नियम के तहत वितरण करने के लिए कहा गया है। फिर अभियान चलाकर जांच की जाएगी, अगर कोई दुकानदार वितरण करने में गड़बड़ी करता हुआ पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि खाद नेपाल पहुंचने से बाजार में खाद की कमी हो जाती है। कमी होने के बाद जहां दुकानदार अधिक दाम पर खाद बेचते हैं। वहीं, दुकानदारों को खाद के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। इस दौरान खेतों में समय से खाद भी नहीं पड़ पाती है, जिससे किसानों की फसल प्रभावित होती है।
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आधार कार्ड से खाद वितरण करने के हैं निर्देश
व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए शासन से आधार कार्ड और किसानों को अंगूठा लगाने के बाद ही खाद वितरण करने का नियम लागू किया है। मगर बॉर्डर पर एक-एक दिन में 20 से 50 बोरी तक खाद के पकड़े जाने से यह अंदाजा लगा सकते हैं कि कहीं न कहीं वितरण करने में गड़बड़ी की जा रही है। एक तरफ किसान दो बोरी के लिए परेशान हैं, वहीं, कैरियर के जरिए तस्कर एक साथ कई बोरी ले जा रहे हैं।
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इतनी मात्रा में यूरिया की खपत
कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में खरीफ के सीजन में लगभग 46 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 16 हजार मीट्रिक टन खाद की खपत हुई थी। तब भी यूरिया के लिए किसानों को परेशान होना पड़ा था। वहीं, रबी की फसल का रकबा अधिक होता है। ऐसे में यूरिया और डीएपी की मात्रा बढ़ेगी। खाद की आपूर्ति अबतक कई बार हो भी चुकी है। हालांकि, इस बार कितनी खाद जिले में आई है, इस बारे में जिम्मेदार जानकारी नहीं दे सके।
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