तन-मन की शुद्धीकरण के लिए खरना के दिन रखा व्रत
छठ महापर्व में व्रती महिलाओं ने पूजन कर किया प्रसाद ग्रहण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। चार दिवसीय छठ महापर्व पर तन और मन के शुद्धीकरण के लिए खरना के दिन उपवास रखकर व्रती महिलाओं ने पूजन किया। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास रखने के साथ एक समय भोजन (प्रसाद) करती हैं। उनके प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही घर के लोग भोजन करते हैं।
छठ पूजा में खरना का विशेष महत्व होता है। खरना में दिन में व्रत रखा जाता है और रात में पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। नहाय खाय के अगले दिन खरना होता है। इस दिन से सभी लोग उपवास करना शुरू करते हैं। कार्तिक माह की शुक्लपक्ष पंचमी को महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को भोजन करती हैं। शाम को गुड़ की खीर खाई जाती है। इस विधि को खरना कहा जाता है। व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रखेंगी और शाम को सूर्यास्त के बाद खीर और रोटी खाएंगी। इस दिन सूर्यास्त के बाद गुड़-दूध की खीर बनेगी और रोटी बनाकर प्रसाद स्वरूप भगवान सूर्य की पूजा करके उन्हें भोग लगाया जाएगा। खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। इसके बाद व्रती छठ पूजा के पूर्ण होने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती हैं। इसके पीछे का मकसद तन और मन को छठ पारण तक शुद्ध रखना होता है। छठ पूजा में सफाई का बहुत ही महत्व होता है, छठ पूजा का प्रसाद बनाने वाली जगह साफ-सुथरी होनी चाहिए। प्रसाद को गंदे हाथों से न तो छूना चाहिए और न ही बनाना चाहिए। खरना के दिन छठी माई के प्रसाद के लिए चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ, घी, आटे से बना प्रसाद बनाया जाता है। साथ ही फल, सब्जियों से पूजा की जाती है। इस दिन गुड़ की खीर भी बनाई जाती है।
खरना में प्रसाद का है विशेष महत्व
खरना पर प्रसाद ग्रहण करने का भी विशेष नियम है। जब खरना पर व्रती प्रसाद ग्रहण करती है तो घर के सभी लोग बिल्कुल शांत रहते हैं। मान्यता के अनुसार शोर होने के बाद व्रती खाना खाना बंद कर देती हैं। व्रती जब प्रसाद ग्रहण कर लेती हैं तो उसके बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन ग्रहण करते हैं। खरना के दिन रसियाव का विशेष प्रसाद बनाया जाता है। इस प्रसाद को हमेशा मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाया जाता है और इसमें सिर्फ आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता है। खरना वाले दिन पूरियां और मिठाइयों का भी भोग लगाया जाता है।
व्रती महिलाओं ने की खरीदारी
छठ पूजा की तैयारी में व्रती महिलाओं ने खरना के दिन भी बाजार से खरीदारी की। उन्होंने पूजन सामग्री से संबंधित फल संतरा, अन्नानास, गन्ना, सुथनी, केला, अमरूद, शरीफा, नारियल आदि की खरीदारी की। उन्होंने प्रसाद बनाने के लिए जरूरी सामग्रियों की खरीद की। छठ पर्व की तैयारी के तहत व्रती महिलाओं ने घर की साफ-सफाई कर परंपरा के अनुसार घर में एक स्थान पर मिट्टी का चूल्हा बनाया। छठ पूर्व के दौरान प्रसाद और पूरा भोजन वहीं बनता है। प्रसाद में साठी के चावल का चिउड़ा, ठेकुआ, दूध, शहद, तिल और अन्य द्रव्य भी शामिल किए जाते हैं।
आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य
हिंदू धर्म में यह पहला ऐसा त्योहार है, जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है, छठ के तीसरे दिन शाम के अर्घ्य वाले दिन पूजन की तैयारियां की जाती हैं। 20 नवंबर के दिन नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। फिर पूजा के बाद अगली सुबह की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। चौथे दिन सुबह के अर्घ्य के साथ छठ का समापन हो जाता है, इसके बाद विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा जाता है। छठ पर्व में सूर्य की आराधना का बड़ा महत्व है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठी माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता है। छठ पर्व में सूर्य की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति तथा संपन्नता प्रदान करती हैं। नि:संतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है और छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उनके जीवन को खुशहाल रखती हैं।
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पहली बार ग्रामीण क्षेत्र में दिखेगा छठ का आकर्षण
संवाद न्यूूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के नव विस्तारित क्षेत्र में स्थित पोखरों पर पहली बार नगरपालिका ने अपनी तरफ से वृहद स्तर पर सफाई, पथ प्रकाश, टेंट, पंडाल आदि का इंतजाम किया है। यह जानकारी नगर पालिका के अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने दी। नगर पालिका के अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि पहला अवसर होगा, जब नगरपालिका को विस्तारित ग्रामीण क्षेत्रों में भी काम करने का अवसर मिला है। इस दृष्टिगत बसडिलिया, महानगा, थरौली और मधुकरपुर में जहां पर माताएं और बहनें छठ पर्व मनाने के लिए पोखरे पर आती हैं। उन सभी पोखरे की साफ-सफाई, सिल्ट की सफाई, लाइट की व्यवस्था, टेंट, पंडाल की व्यवस्था का प्रबंध करने का उचित कदम उठाया गया। इस बार होने वाले छठ पर्व में नगरपालिका के ग्रामीण क्षेत्र में भी छठ पर्व पर मनमोहक वातावरण दिखेगा।