जान की परवाह न जुर्माने का ‘डर’
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए यातायात नियमों को सख्त बनाया जा रहा है। इसका पालन न होने से हादसों में वृद्धि हो रही है। लोगों को न तो जान की परवाह है न ही हादसे का डर परिणामस्वरूप साल दर साल सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, हादसे के शिकार होने पर कई लोग दिव्यांग की जिंदगी जीने को विवश हैं। मगर हादसों से कोई सबक नहीं लेने वाला है।
सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार अपने स्तर से लोगों को जागरूक कर रही है। गैर सरकारी संस्थाएं भी अभियान चलाकर यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रही हैं। बावजूद इसके हादसों के आंकड़े पर नजर डालें तो वह घटने के बजाय बढ़ रहे हैं। क्योंकि ट्रैफिक नियमों को तोड़कर जुर्माना राशि भर देने से लोग छूट जाते हैं। फिर वही काम करते हैं। कारण जुर्माना राशि कम थी। मगर शासन ने नए मोटर वाहन नियमावली में बड़ा बदलाव करते हुए जुर्माना राशि को बढ़ा दिया है। वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करते हुए पाए जाने पर एक हजार रुपये की जुर्माना राशि तय की गई है, जो पहले कम थी। वहीं, अन्य जुर्माना राशि में वृद्धि की गई है। शासन का यह कदम कितना कारगर होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना जरूर है कि जुर्माने की राशि बढ़ा देने से भी लोग नियमों को तोड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं। तीन सवारी, बाइक चलाते समय मोबाइल करना मानों युवाओं का शौक बन गया हो। गुरुवार को साड़ी तिराहा स्थित पुलिस पिकेट के पास ऐसे कई वाहन गुजरते हुए देखे गए। उन्हें न तो अपनी जान की परवाह थी और न ही नियमों के प्रति गंभीरता। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने बताया कि ट्रैफिक व थानों की पुलिस को नियमित चेकिंग और जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही समय-समय पर अभियान चलाकर वाहन चालकों को जागरूक कराया जाता है।