12 लाख की आबादी पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
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सिद्धार्थनगर। जिले के 2,86,728 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आधे से अधिक 1,90,495 हेक्टेयर भू-भाग बाढ़ प्रभावित है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले 12 लाख आबादी की सुरक्षा का जिम्मा 444 किमी लंबे 39 तटबंधों पर निर्भर है। वहीं, इन तटबंधों की हालत रैन कट व रैट होल से जर्जर है जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद आबादी पर खतरा मंडरा रहा है।
प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों में शामिल इस जिले के 1693 गांव बाढ़ प्रभावित रहते है। इन गांवों व कस्बों में रहने वाली 12 लाख से अधिक आबादी प्रत्येक साल बारिश के मौसम में आने वाली बाढ़ से सशंकित रहते हैं। इन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे तटबंधों की हालत बेहद खराब है। जिले में सिंचाई के दो खंडों को इन बांधों की मरम्मत व देखभाल की जिम्मेदारी है। इनमें सिंचाई निर्माण खंड के अधीन 22 तटबंधों की लंबाई 296.74 किलोमीटर है। वहीं, ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के जिम्मे 157.76 किमी लंबे 17 बांधों की मरम्मत व देखभाल की जिम्मेदारी है। इन बांधों की मरम्मत व रखरखाव का कार्य विभागीय आंकड़ों में प्रत्येक वर्ष किया जाता रहा है लेकिन हालत ज्यों की त्यों बनी हुई है। जिले के नरकटहा बांध, अशोगवा-नगवा बांध, फत्तेपुर-खजूरडाड़ बांध, बांसी-पनघटिया बांध व लखनापार-बैदौला बांध समेत सभी बांधों की दशा रैन कट व रैट होल से जर्जर हो चुकी है। इस वर्ष भी बांधों की मरम्मत व कटान स्थलों पर बचाव कार्य नहीं कराए जाने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सांसें अटकी हुई हैं। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि सिंचाई निर्माण खंड के 22 तटबंधों की मरम्मत व बचाव कार्य के लिए विभाग की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के सापेक्ष सिर्फ 10 प्रतिशत धनराशि शासन से आवंटित हुआ है। विभाग की तरफ से इस वित्तीय वर्ष में तीन सौ किमी लंबे बांधों की मरम्मत व अनुरक्षण आदि कार्य के लिए 12 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। शासन से मात्र 1.35 करोड़ रुपये ही आवंटित किया गया है।