पथरा। बांसी तहसील क्षेत्र के पथरा, मिठवल, टेढिया, तिलौली, डिंडई, मसिना खास, गौरागढ़ सहित अधिकांश चौराहों और बाजारों में संदिग्ध गुणवत्ता वाले धान के बीजों से किसान परेशान है। पिछले वर्ष बीज की रोपाई के बाद 45 दिन में ही बालियां निकल जाने के बाद किसान डरे हुए हैं। वहीं, विभाग बीज केंद्रों पर जांच और गुणवत्ता निर्धारण संबंधी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे किसान आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, जून के प्रथम सप्ताह से किसान धान की नर्सरी डालना शुरू कर देते हैं। इसके लिए इन दिनों धान बीज की खरीदारी जोरों पर है। वहीं, बीज बेचने वाली कुछ कंपनियां किसानों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न किस्मों के नाम और आकर्षक स्टीकर लगाकर बीज बेच रही हैं। किसानों का आरोप है कि इनमें से कई बीज अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं होते, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। क्षेत्र के किसान शारदा चौधरी ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने एक निजी दुकान से धान का बीज खरीदा था। रोपाई के करीब 45 दिन बाद ही धान में बाली निकलने लगी और कुछ ही दिनों में फसल मुरझाकर सूख गई। इससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई। किसान सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कृषि इकाई पथरा से करीब 15 किलोमीटर दूर महोखवा के पास स्थापित है। दूरी अधिक होने के कारण किसानों को निजी दुकानों से बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। किसानों का कहना है नकली बीजों की बिक्री पर रोक लगाया जाना बहुत ही जरूरी है। इस संबंध में मिठवल कृषि इकाई पर तैनात बाबू राम नाथ वर्मा ने बताया कि इकाई पर कई तरह की बीज उपलब्ध है, जिस पर सब्सिडी भी दी जा रही है।