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Siddharthnagar News: किसान अभी तैयारी में, तस्कर नेपाल भेजने लगे यूरिया

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। धान की रोपाई के साथ किसानों को डीएपी की जरूरत पड़ेगी। उससे चार कदम आगे बढ़कर तस्कर यूरिया बाॅर्डर पार करने लगे हैं। यूरिया की जरूरत अभी दो माह बाद पड़ेगी।
ऐसे में तस्कर सीमावर्ती क्षेत्र की दुकानों से सेटिंग करके खाद नेपाल पहुंचाने लगे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बाॅर्डर पर सख्ती बढ़ गई है। इसलिए गाड़ी के बजाय साइकिल और बाॅर्डर तक पहुंचाकर सिर पर रखकर सीमा पा कर दी जा रही है।
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एक पखवाड़े में यूरिया तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। अगर तस्करी पर अंकुश नहीं लगा तो यूरिया के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ेगी। धान और गेंहू की फसल की बुवाई और रोपाई के साथ किसानों को खाद की जरूरत पड़ती है। डीएपी और यूरिया इसमें प्रमुख खाद है। खाद तो पर्याप्त मात्रा में जनपद में आवंटित होती है, लेकिन इसके बाद खाद की किल्लत शुरू हो जाती है। जैसा कि रबी के सीजन में बुवाई में एक- एक बोरी डीएपी और यूरिया के लिए किसानों को कई दिनों तक लाइन लगानी पड़ी। निजी दुकानों से किसानों को अधिक दाम देकर खाद खरीदनी पड़ती है।
इस बार धान का सीजन शुरू हो रहा है, लेकिन इस सीजन में भी खाद की समस्या से इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि एक से डेढ़ माह में धान की रोपाई के साथ डीएपी की जरूरत पड़ेगी। वहीं, रोपाई के कुछ दिन बाद यूरिया की जरूरत पड़ेगी। अभी से यूरिया की तस्करी बढ़ गई है। एक पखवाड़ा में कई बार यूरिया के साथ तस्कर पकड़े गए। इनमें नेपाली और भारतीय दोनों शामिल रहे हैं। इसका केंद्र बढ़नी और खुनुवां बाॅर्डर है। क्योंकि यहीं से अभी तक तस्करी के मामले पकड़े जा रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के मुताबिक यह सब सीमावर्ती क्षेत्र की खाद दुकानदारों और तस्करों की सेटिंग से हो रहा है। लोगों से चर्चा में सीमावर्ती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही खाद तस्करी की हकीकत सामने आई है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में उर्वरक की दुकान और गोदाम अलग-अलग बने हैं। तस्करों की सेटिंग दुकानदार से है, दुकान पर रुपये जमा होता है और बाद में गोदाम से खाद दी जाती है।
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आवंटित होती है इतनी खाद : आंकड़ाें के मुताबिक जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर धान और गेहूं की खेती होती है। इतने रकबे के लिए 10687 मीट्रिक टन डीएपी, 6211 मीट्रिक टन एनपीके, एमओपी 1381 मीट्रिक, सुपर फास्फेट 20899 मीट्रिक टन। जबकि, यूरिया 47 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य है। इसमें 27 हजार एमटी, निजी दुकानों और समितियों को आवंटित होती है।
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