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Siddharthnagar News: अस्पताल में नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा, लापरवाही का आरोप

Sat, 27 Jun 2026 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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ढेबरुआ। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी कस्बे के एक निजी अस्पताल में प्रसव के करीब 36 घंटे बाद बृहस्पतिवार रात नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की जांच में ऑपरेशन थिऐटर में गड़बड़ी सहित अन्य खामियां सामने आने पर अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई गई। मरीज की केस हिस्ट्री नहीं दिखा पाने पर अस्पताल के लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी भी दी है।
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जानकारी के अनुसार, ढेकरही निवासी नीरज कुमार प्रसव पीड़ा होने पर अपनी पत्नी पूजा को 23 जून की शाम बढ़नी स्थित निजी अस्पताल हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। परिजन का आरोप है कि अस्पताल के प्रबंधन का कार्य देख रहे डॉ. बिलाल अहमद खान ने तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन कराने की बात कही और लगभग 25 हजार रुपये खर्च बताया। इस पर नीरज ने 10 हजार रुपये जमा कराए, जिसके बाद महिला का ऑपरेशन किया गया और पुत्र का जन्म हुआ।
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद जिस वार्ड में महिला और नवजात को रखा गया था, वहां अत्यधिक गर्मी थी। उनका कहना है कि इसी कारण बच्चे का दम घुट गया और करीब 36 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी ले गए, जहां मौजूद डॉ. प्रदीप वर्मा ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। हंगामे के दौरान कुछ देर के लिए अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना पर डायल-112 की पीआरवी और चौकी इंचार्ज वीरेंद्र यादव मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने बताया कि यदि परिजनों की ओर से लिखित तहरीर दी जाती है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर, अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया। अस्पताल के प्रबंधक डॉ. बिलाल अहमद खान का कहना है कि नवजात की मौत संभवत दूध श्वास नली में चले जाने के कारण हुई होगी। वहीं, पीड़िता पूजा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने बच्चे को अपना दूध पिलाया ही नहीं था। डॉक्टर के निर्देश पर बाहर से बाजार का दूध पिलाया गया था।
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मामले की जानकारी मिलने पर सिद्धार्थनगर के नोडल अधिकारी (नैदानिक स्थापना) डॉ. मानवेंद्र पाल, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश चौधरी के साथ अस्पताल पहुंचे और जांच की। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई कमियां पाई गईं। जांच के समय अस्पताल में कोई नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला और ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं पर भी अधिकारियों ने नाराजगी जताई। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्था में ऑपरेशन थिएटर का संचालन नहीं किया जा सकता। समाचार लिखे जाने तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी थी और किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं दी गई थी।

संचालक ने नहीं दी केस से जुड़ी फाइल, लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
अस्पताल की जांच करने के लिए पहुंचे नोडल अधिकारी डॉक्टर मानवेंद्र पाल ने अस्पताल के संचालक और प्रबंधक डॉक्टर बिलाल से मरीज की केस शीट मांगी, जो डॉक्टर बिलाल नहीं दिखा पाए। उन्होंने कहा डॉक्टर साहब केस शीट अपने साथ ले गए हैं। इस पर नोडल अधिकारी ने कड़ी फटकार लगाई और कहा कि केस शीट नहीं दिखाई तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल रजिस्ट्रेशन में डिग्री लगाने वाले डॉक्टर नईम और एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टर एमपी कसौधन से बात की तो दोनों डॉक्टराें ने कहा कि मुझे कोई जानकारी नहीं है कि उस मरीज की सर्जरी किसने की। इस पर भी उन्होंने नाराजगी जताई , डॉक्टर बिलाल ऑपरेशन के बाद दवा का प्रिस्क्रिप्शन भी नहीं दिखा पाए। ऐसे में अस्पताल पर कार्रवाई हो सकती है।
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