आग का तांडव जिले में लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। आग ने शनिवार को करीब दो हजार बीघा खेतों में खड़ी फसल को अपनी चपेट में ले लिया। आग से कई गांवों में पूरी फसल नष्ट हो गई है। कहीं डंठल जलाते समय आग लगी तो कहीं शार्ट सर्किट से आग लगी।
डुमरियागंज, भनवापुर, बांसी, पथरा, खेसरहा, उसका, ढेबरुआ, मोहाना क्षेत्रों में अगलगी की घटनाएं हुईं। तेज हवा के लपटों के आगे लोग बेबस बने रहे। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। फायर ब्रिगेड की टीमें हर जगह देर से पहुंची।
शनिवार की सुबह करीब 11 बजे भनवापुर के पड़िया गांव के पूरब स्थित सिवान में हनुमान प्रसाद की बोरिंग पर गांव के ही किसान घरभरन व उसका भाई हृदयराम अपने खेतों में पंपिंग सेट लगाकर प्याज के खेत में पानी चला रहे थे।
तभी पंपिंग सेट से एक चिंगारी निकलकर तेज पछुवा हवा के झोंके के सहारे उड़कर बगल के खेत में पहुंच गई। देखते ही देखते चिंगारी ने शोले में तब्दील होकर सिवान को अपने आगोश में ले लिया। तेज हवा से भड़की आग नेे सरोथर कठौतिया व मंगराव के सिवान को भी अपनी जद में ले लिया।
अगल-बगल के सिवान जलते देख आपस पास के ग्रामीण व किसान अपने-अपने संसाधन से आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना फायर सर्विस को भी दी। अभी लोग आग पर काबू पाते उसके पहले ही आग ने विकराल रूप धारण करते हुए कठौतिया गोकुल के सिवान में खड़े गेहूं के फसल को तेजी से जलाने लगी।
करीब ढ़ाई घंटा देरी से दमकल कर्मी गाड़ी के साथ पहुंचे। पीड़ित किसान राममिलन, रामनेवास, ओमप्रकाश, चैतू, दयाराम, ज्ञानदास, कोदई, राजाराम, घुरहू, रामकृपाल, शिवदीन, रामपति, मोती, दूधनाथ, गिरधारी, श्रवण, काशी, गिरधारी, सोदे आदि ने बताया कि चारों गांवों के करीब 200 किसानों का 800 बीघा गेहूं की फसल आग से जलकर राख हो गई है।
लोगों ने आरोप लगाया कि अगर दमकल की गाड़ी समय पर पहुंच जाती तो इतना नुकसान नहीं होता।
इस संबंध मेें डुमरियागंज तहसीलदार मेवालाल ने बताया कि मौके पर हलका लेखपाल को भेजा गया है। नुकसान की रिपोर्ट आने के बाद उसे शासन को भेजी जाएगी। पीड़ित किसानों को हर हाल में आर्थिक सहायता दी जाएगी। आग लगने में अगर कोई दोषी मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।