भनवापुर। क्षेत्र में धान के फसल की कटाई का दौर तेजी से चल रहा है। जिन किसानों ने धान के फसल की कटाई कर ली है,वे गेहूं व सरसों की बुवाई के लिए खेतों की तैयारी कर रहे है। फसल का उत्पादन उसके बीज की गुणवत्ता,प्रजाति के साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति पर निर्भर करता है। किसान समझते हैं कि फसलों में अधिक मात्रा में उर्वरक प्रयोग करने उपज अधिक होता है,जिसके कारण लोग जरूरत से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर देते हैं।
किसी भी फसल में जरूरत से अधिक उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों में बीमारियों के साथ ही कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। फसलों के पौधे जरूरत से ज्यादा उर्वरक पानी के साथ भूमिगत होकर नदी व तालाब के पानी को दूषित करते हैं,जिसके कारण उत्पादन लागत अधिक आती है।
यह जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक मृदा डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने बताया कि किसान अपने खेतों में जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। संवाद