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Siddharthnagar News: लगन के साथ मेहनत करने पर हर मुश्किल राह हो जाती है आसान

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-डुमरियागंज क्षेत्र के नीट यूजी पास करने वाले होनहारों ने साझा किया अनुभव
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। हर सपना तब तक अधूरा रहता है, जब तक उसे मेहनत की आग में तपाया न जाए। नीट यूजी-2025 के नतीजे इस बात की गवाह हैं कि अगर इरादे सच्चे हों और हौसला बुलंद तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। डुमरियागंज क्षेत्र के इन होनहारों ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि अपने जुनून, संघर्ष और अनुशासन से मिसाल भी कायम की। किसी ने सोशल मीडिया को अलविदा कहा, तो किसी ने तीन बार हारने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी।
इनकी कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस सफर की है, जिसमें हर मोड़ पर था आत्मविश्वास और उम्मीद का उजाला। आइए मिलते हैं, नीट यूजी-2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले इन सितारों से, जिन्होंने अपनी मेहनत से सपनों को हकीकत बना दिया।
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बचपन का सपना बना वास्तविकता
डुमरियागंज। श्रद्धा गुप्ता बताती हैं कि डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही है। इसके लिए हाईस्कूल के बाद से ही तैयारी कर रही थी। इंटरमीडिएट के बाद नीट यूजी की परीक्षा दी और परिणाम सामने है। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। हर दिन छह से आठ घंटे की नियमित पढ़ाई से सफलता मिली। इस दौरान बाबा-दादी, माता-पिता और शिक्षकों का अहम योगदान रहा है। उम्मीद है कि बेहतर मेडिकल संस्थान मिल जाए। पहला लक्ष्य एमबीबीएस बनना है। किताबें पढ़ने के साथ ही नियमित रूप से प्रश्न पत्र हल करती थी। साथ ही पिछले पांच साल के पुराने पेपर के प्रश्नों को समझने और उसके आधार पर आगे की तैयारी और माक टेस्ट से मदद मिली। संवाद
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डॉक्टर बनने का सपना हुआ पूरा, तीसरी बार में मिली सफलता

भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के तरहर गांव निवासी रौनक पांडेय ने बताया कि नीट यूजी की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद हमारा डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो गया है। प्राथमिक शिक्षा डुमरियागंज के एक निजी स्कूल से करने के बाद वर्ष 2021 में हाईस्कूल व 2023 में इंटर की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग बस्ती से किया।इंटर से ही नीट परीक्षा की तैयारी शुरू कर दिया था।पहले और दूसरे बार की परीक्षा में असफल होने के बाद तीसरे बार में सफलता मिल गई। अपने तैयारी के बारे में रौनक ने बताया कि इसके लिए कम से कम आठ से नौ घंटे की प्रतिदिन पढ़ाई जरूरी है। सोशल मीडिया से दूरी, बना कर पूर्व में दिए गए परीक्षा में असफल होने के कारणों को ध्यान में रखते हुए उन कारणों को दूर करने के बाद सफलता मिल गई। 720 में 592 अंक प्राप्त करने वाले रौनक पांडेय ने बताया कि हमें उम्मीद है कि अच्छे से अच्छा मेडिकल कॉलेज मिलेगा, जहां पूर्ण मनोयोग से पढ़ाई कर अच्छा डॉक्टर बन कर समाज की सेवा करूंगा। रौनक ने अपने इस सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों की दिया है।
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