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इटवा में माता प्रसाद तो बांसी में लालजी ने संभाली विपक्ष की कमान

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सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की कोशिश में जुटी समाजवादी पार्टी
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नामांकन के एक दिन पहले भाजपा के साथ सपा प्रत्याशियों ने भी खरीदा पर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नामांकन से एक दिन पूर्व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में सपा सभी 14 ब्लॉकों में दमदारी से प्रत्याशी उतारने की जुगत में लग गई है। इसी व्यूह रचना के क्रम में इटवा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने पत्नी सूर्यमती पांडेय और बांसी में जिलाध्यक्ष लालजी यादव ने पत्नी नीलम के नाम से पर्चा खरीदा है।
चुनावी तैयारी के क्रम में सपा के दिग्गज प्रमुख पद के चुनाव में परिजनों को भी मैदान में उतारने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। इटवा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और बांसी से जिलाध्यक्ष लालजी यादव अपनी-अपनी पत्नी को चुनाव में विजयश्री दिलाने के लिए कमर कस चुके हैं।
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लालजी यादव ने बताया कि सपा सभी सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ेगी। भाजपा को हराने के लिए लोटन समेत जहां अन्य विपक्षी दल मजबूत स्थिति में होंगे उन्हें समर्थन दिया जाएगा।
डुमरियागंज से सपा नेता रामकुमार उर्फ चिनकू यादव ने बताया कि उनके परिजन भी क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी सदस्य) हैं लेकिन पार्टी कार्यकर्ता निधि त्रिपाठी को पूरी दमदारी से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ाया जा रहा है। सपा नेता उग्रसेन सिंह ने शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉक में चुनाव लड़ाने की कमान संभाली है। इसी क्रम में कपिलवस्तु क्षेत्र में पूर्व विधायक विजय पासवान क्षेत्र के सभी ब्लॉकों में प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
भाजपा की सूची में कुछ गैर चर्चित नाम भी
भाजपा द्वारा बुधवार को जारी ब्लॉक प्रमुख पद के प्रत्याशियों की सूची में कुछ गैर चर्चित नाम भी शामिल हैं। जिले की राजनीति की समझ रखने वालों की मानें तो सूची में तीन ब्लॉक ऐसे हैं, जहां विपक्ष के मजबूत दावेदार के सामने भाजपा ने गैर चर्चित चेहरों को उतारा है। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव का दावा है कि भाजपा के सभी दावेदार मजबूत स्थिति में हैं।
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जिताऊ उम्मीदवारों पर भी दांव
भाजपा की सूची में पार्टी कार्यकर्ताओं को टिकट मिला ही है। कुछ ब्लॉकों में बाहर से आए जिताऊ उम्मीदवारों पर भी दांव लगाया गया है। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें जिला पंचायत चुनाव में अपना मत देने का इनाम मिला है। साधना चौधरी को छोड़ भाजपा के अन्य बड़े नेताओं ने अपने परिजनों को चुनाव में उतारने से परहेज किया है।
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