सिद्धार्थनगर। विद्युत व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने शुक्रवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। निजीकरण की व्यवस्था को जनविरोधी करार देते इसे वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि विद्युत कर्मचारी दिन-रात एक कर जनता को बेहतर सुविधा देने व राजस्व बढ़ाने में लगे हुए हैं। बावजूद सरकार इसे निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। शुरुआत पांच शहरों से की जा रही है, जिसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जाना है। किसी भी हाल में विद्युत कर्मचारी ऐसा नहीं होने देंगे। धरने में एसडीओ दीपक कुमार, अखिलेश्वर प्रसाद, सुरेंद्र कुमार, जेई विनय कुमार, नित्यानंद ओझा, इंद्रेश बहादुर, सुरेंद्र कुमार, पंकज विश्वकर्मा, अनिल यादव, विकास कुमार, रविकांत सिंह, गणेश कुमार मिश्र, अभिषेक श्रीवास्तव, अरुण पाल, अरुण चौरसिया, मदन, आशुतोष अग्रहरि, अरुण द्विवेदी, रामजी मिश्र, गौरव कुमार, रामायण प्रसाद, पूरन चौधरी आदि मौजूद रहे।
डुमरियागंज। विद्युत व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने शुक्रवार को दूसरे दिन भी धरना जारी रहा। शाम 3 से 5 बजे तक दो घंटे तक अधिकारी व कर्मचारी कार्य बहिष्कार किया।
जेई डुमरियागंज विनीत कुशवाहा ने कहा कि सरकार ने विद्युत व्यवस्था का निजीकरण करना शुरू कर दिया है। निजीकरण में 6.74 लागत के सापेक्ष 3.91 रुपये मिलेंगे। पावर कारपोरेशन को 2.83 रुपये प्रति यूनिट का नुकसान उठाना पड़ेगा। पांच महानगरों की विद्युत व्यवस्था को निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह महानगर गोरखपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, मेरठ व लखनऊ है। इन महानगरों का प्रदर्शन पहले से ही बेहतर है। इसके विरोध में पूरे प्रदेश के सभी विद्युत कर्मचारी, अधिकारी एकजुट होकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ संघर्षरत हैं। इस दौरान एसडीओ रितेश कौशल, मुलायम सिंह यादव, राधेश्याम, जितेंद्र श्रीवास्तव, रामकरन, पवन कुमार, मोहम्मद मुस्तफा, बद्री प्रसाद, मनोज कुमार, अमरनाथ यादव, मुबारक, अगंद कुमार, सिद्धार्थशंकर गुप्ता, राजेश गुप्ता, अजय कुमार त्यागी, भागीरथी, बीपी सिन्हा आदि मौजूद रहे।