केंद्रीय कर्मचारियों के समान भत्ता, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, तीन प्रोन्नत वेतनमान का लाभ देने सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही।
सरकारी कार्यालयों में बुधवार को भी ताला लगा रहा। कार्यालय परिसर में एकत्रित होकर कर्मचारियों ने नारेबाजी की और मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
कलेक्ट्रेट परिसर में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ हैं, बावजूद सरकार हमारी उपेक्षा करने में लगी हुई है।
लगातार धरना-प्रदर्शन आंदोलन करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। न तो केंद्रीय कर्मचारियों के समान भत्ते दिए जा रहे हैं और न ही प्रोन्नति वेतनमान का लाभ।
पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर लागू की गई नई पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों के हित में नहीं है। रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की जा रही है, अलबत्ता ठेकेदारी प्रथा से काम कराया जा रहा है।
इन तमाम अनियमितताओं से कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी है। इसे हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारी अपने हितों के लिए हर स्तर पर विरोध करने को तैयार हैं। सरकार अपना रवैया बदले, वरना गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
प्रदर्शन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिला संयोजक अनिल सिंह, शिवाकांत पांडेय, मंडल मंत्री अरुण कुमार प्रजापति, भूपेश शुक्ला, मनोज पांडेय, विनोद त्रिपाठी, हरीश पांडेय, उदय प्रताप सिंह, अब्दुल्ला खां, शिवपूजन मणि त्रिपाठी, रणवीर सिंह, दीपेन्द्र मणि, हरिश्चन्द्र, काशीराम, दिनेश, ओमप्रकाश पांडेय, सुरेश, एसएन पांडेय, अनिल कुमार, शाहनवाज सिद्दीकी आदि शामिल रहे।