उभरते खिलाड़ियों को मिलेगा तरक्की का प्लेटफॉर्म
स्पोर्ट्स स्टेडियम में बनेगा खेलो इंडिया का सेंटर
एथलेटिक्स के 24 स्पर्धाओं के संसाधन होंगे उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में उभरते हुए खिलाड़ियों को अब तरक्की का प्लेटफॉर्म मिलने की उम्मीद है। खेल में कॅरियर बनाने का सपना देखने वाले 15 वर्ष उम्र के बालक-बालिकाओं को जिले में ही बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलो इंडिया का सेंटर बनाने की स्वीकृति मिली है। जिले में एथलेटिक्स के 24 इवेंट्स के पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया (साई) ने जिला खेल कार्यालय से तीन खेलो के सेंटर चुनने का विकल्प मांगा था, जिसमें खेल विभाग ने एथलेटिक्स सेंटर की मांग की थी और यह उपलब्धि प्राप्त हो गई। जिले में खेल की उपलब्धियां बहुत कम है। ऐसी स्थिति में जिले में साई सेंटर शुरू होने से खेल और खिलाड़ियों के विकास की उम्मीद जगी है। जिले में 12 एकड़ क्षेत्र में स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाया गया है, जिसमें एथलेटिक्स के आठ लेन का रनिंग ट्रैक बनाया गया है। अब यहां रनिंग ट्रैक, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जबलिन थ्रो, ट्रिपल जंप, हर्डल रेस, हाई एवं लांग जंप सहित 24 इवेंट के ग्राउंड बनने के साथ खेल उपकरण भी उपलब्ध होंगे। योजना के अनुसार चयनित 30 खिलाड़ियों को खेलने के लिए पूरी सुविधा दी जाएगी। एथलेक्टिस के प्रशिक्षित प्रशिक्षक नियुक्ति किए जाएंगे। इस बाबत जिला खेल अधिकारी सर्वदेव सिंह यादव ने कहा कि खेलो इंडिया स्कीम के अंतर्गत एथलेटिक्स सेंटर की स्वीकृति प्राप्त मिली है। निदेशालय से खिलाड़ियों के उम्र का निर्धारण होगा, जबकि संभावना है कि 12 से 15 वर्ष उम्र के बालक-बालिकाओं का चयन किया जाएगा।
समिति करेगी खिलाड़ियों का चयन
डीएम दीपक मीणा ने जिले में एथलेटिक्स सेंटर बनाने का अनुमोदन कर शासन को भेजा था। स्वीकृति प्राप्त होने के बाद खेल निदेशालय उप्र को बजट प्राप्त होगा। डीएम की अध्यक्षता में बनाई जाने वाली समिति के माध्यम से प्रशिक्षक व प्रशिक्षुओं का चयन किया जाएगा। जिसमें खेल अधिकारी, एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव/ कोषाध्यक्ष, जिला विद्यालय निरीक्षक, भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल होंगे। एनएसआरएस पोर्टल पर प्रशिक्षक व चयनित खिलाड़ियों का पंजीकरण किया जाएगा।
फिजिकल और स्किल टेस्ट
चयनित खिलाड़ियों का प्रत्येक माह फिजिकल व स्किल टेस्ट होगा। शासनादेश के अनुसार पांच लाख रुपये की धनराशि से प्रशिक्षक का मानदेय, खिलाड़ियों की किट व अस्थायी उपकरणों का व्यय होगा, जबकि दो लाख रुपये के बजट से खेल मैदान के रख रखाव व स्थायी उपकरणों की खरीद पर व्यय किया जाएगा।