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Siddharthnagar News: एनएमसी के मानक पर होगी इमरजेंसी, माइनर ओटी भी बदलेगी

Tue, 20 Aug 2024 05:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सक्रिय हुई कमेटी
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माइनर ओटी में भी हुई सफाई, बदल रही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में व्यवस्था बदलने लगी है। अब नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों के अनुसार इमरजेंसी में सुविधाएं मिलेंगी। इमरजेंसी के आकार और संसाधन बढ़ने के साथ माइनर ओटी के साथ आवश्यक जांचें भी 24 घंटे उपलब्ध होगी। तब अधिक गंभीर मरीजों को भी रेफर करना ही अंतिम विकल्प नहीं होगा। मेडिकल कॉलेज ने तैयारी तेज कर दी है। संभावना है कि एक माह में ओटी की तस्वीर बदल जाएगी।
अमर उजाला ने 19 जुलाई के अंक में इमरजेंसी में सुविधाओं पर खबर प्रकाशित की तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन सक्रिय हो गया। माइनर ओटी में उपकरणों में जंग लगे होने की खबर के बाद सोमवार को माइनर ओटी में सफाई की गई, जबकि ओटी के उपकरणों को भी स्टरलाइज करने के इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके साथ इमरजेंसी में उपकरणों को स्टरलाइज करने के लिए आटोक्लेव की स्थाई व्यवस्था बनाने पर भी काम शुरू हो गया है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश मोहन ने इमरजेंसी को नेशनल मेडिकल कमीशन के मानक अनुसार बनाने के लिए दस सदस्यीय समिति बनाई है। उन्होंने तत्काल रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ क्रय समिति को भी पहले से ही सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।

इमरजेंसी में बदलेगी ये सुविधाएं
इमरजेंसी के आसपास के वार्डों को नई बिल्डिंग में शिफ्ट करके आकार और संसाधन बढ़ाने की योजना है ताकि मरीजों की संख्या बढ़ने पर दिक्कतों का सामना न करना पड़े। माइनर ओटी में लाइट, टेबल और संसाधन बढ़ाने के साथ ऑटोक्लेव की सुविधा दी जाएगी। इसके 24 घंटे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड एवं आवश्यक पैथोलॉजी जांच की सुविधा होगी, जबकि दूसरे चरण में आईयूसी की सुविधा भी बढ़ाई जाएगी। इमरजेंसी के एक कमरे में आईसीयू लेवल के छह बेड हैं, उन्हें संचालित होने पर अधिक गंभीर मरीजों के इलाज में भी सुविधा मिलेगी, क्योंकि गंभीर मरीजों को रेफर करने के बाद रास्ते में उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की योजना है कि अधिक से अधिक ट्रामा के गंभीर मरीजों की जान बचाई जाए।
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वर्जन
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी को एनएमसी के मानक के अनुसार बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए डॉक्टरों की समिति रिपोर्ट तैयार कर रही है। संभावना है कि एक माह के अंदर इमरजेंसी में बदलाव नजर आने लगेगा। माइनर ओटी के उपकरणों को आटोक्लेव में स्टरलाइज करने के लिए माइक्रोबॉयोलॉजी डिपार्टमेंट से बात की जा रही है।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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