संतकबीरनगर। विद्युत निगम के निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप सिंह ने कहा कि देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 10 मार्च को प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को संसद में पेश किए जाने के विरोध में कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
संघर्ष समिति ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि किसान विरोधी, उपभोक्ता विरोधी और कर्मचारी विरोधी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को संसद में पेश न किया जाए। यदि सरकार इस बिल को संसद में पेश करती है तो देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका जोरदार विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले विद्युत मंत्रालय ने इस बिल पर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। देशभर के पावर सेक्टर से जुड़े सभी फेडरेशनों, ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने सर्वसम्मति से कहा था कि यह बिल जनविरोधी है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
इसके विपरीत 30 जनवरी 2026 को विद्युत मंत्रालय ने एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन को भी शामिल किया गया, जो खुले तौर पर बिजली क्षेत्र के निजीकरण का समर्थन करता रहा है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी आर्यन कुमार ने कहा कि जिस संगठन ने पहले ही इस बिल का समर्थन कर दिया है, उसे ही कानून को अंतिम रूप देने वाले वर्किंग ग्रुप में शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक बनाता है। उन्होंने कहा कि देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर विद्युत मंत्रालय के इस एकतरफा कदम के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं और इसका पुरजोर विरोध करने के लिए तैयार हैं।
इस दौरान नारायण चंद्र चौरसिया, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद, सहायक लेखाकार संतोष गुप्ता, नारायण चंद्र चौरसरिया, भास्कर पांडेय, विजय कुमार, श्रवण प्रजापति, संजय यादव, मनीष मिश्रा, राजकुमार , वीरेंद्र मौर्य आदि मौजूद रहे।