पडरौना। ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच खाड़ी देशों में जिले के हजारों कामगार फंसे हुए हैं। फंसे कामगार हर हाल में सुरक्षित वतन वापसी चाहते हैं। इसको लेकर उनके अंदर छटपटाहट तेज हो गई है। इसकी वजह फंसे कामगार युद्ध की विभीषिका बता रहे हैं,जो उन्हें वतन वापसी को एक मजबूरी बना दिया है। होली की खुशियां और अपनों की शादियां अब फंसे लोगों के लिए यादें बनकर रह गई हैं। उन्हें सबसे बड़ी जद्दोजहद अपनी जान बचाने व आजीविका बचाने की है। यह हम नहीं कह रहे हैं, खाड़ी देशों में फंसे जिले के विभिन्न क्षेत्रों के फंसे कामगारों ने बातचीत में अपनी दर्द बयां की है।
28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद ईरान के जवाबी कार्रवाई में बहरीन,कुवैत और यूएई जैसे देशों में असुरक्षा बढ़ा दी। बममारी और मिसाइलों से एक दूसरे पर हमला कर पहुंचाए जा रहे नुकसान की विभीषिका को देखकर फंसे जिले के कामगार वतन वापस आने के लिए छटपटा रहे हैं। लगातार बमों की बरसा व मिसाइलों से निकल रही आग व गिर रहे गोले के बीच धधक रहे खाड़ी देशों का वातावरण फंसे कामगारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वह अपने जीवन की सुरक्षा को लेकर भय में जी रहे है,दिन व रात का चैन व नींद गायब हो गई है। सिर्फ उन्हें सायरन की गूंज व विमानों से गिर रही बमों से धरती के थर्राने की आवाज ही सुनाई दे रही है। वह भय में जी रहे हैं।