सिद्धार्थनगर। रसोई गैस की अनियमितता और ईंधन संकट के बीच बिजली को विकल्प बनाने वाले उपभोक्ताओं को फिर एक बड़ा झटका लगा है। जून के बिल पर 10 प्रतिशत सरचार्ज लागू होने से घरेलू बजट, छोटे कारोबार और ग्रामीण उपभोक्ताओं की लागत बढ़ गई है। पहले से महंगाई झेल रहे परिवारों के लिए यह एक और आर्थिक दबाव बनकर सामने आया है।
गैस की कीमतों और सप्लाई की अनिश्चितता से परेशान उपभोक्ताओं ने जब बिजली को सहारा बनाया तो उम्मीद थी कि कुछ राहत मिलेगी लेकिन जून के बिल पर 10 प्रतिशत सरचार्ज ने उसी राहत को और महंगा बना दिया। सिद्धार्थनगर सहित ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में इसका असर साफ दिखने लगा है। कई परिवारों ने गैस की जगह इंडक्शन, इलेक्ट्रिक केतली और माइक्रोवेव का इस्तेमाल शुरू किया था, लेकिन अब बिजली बिल बढ़ने की आशंका से वे फिर असमंजस में हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले गैस महंगी थी, अब बिजली भी महंगी होती जा रही है। ऐसे में घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो गया है।
शहर के अलावा बांसी, डुमरियागंज, बढ़नी और शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में कई परिवारों ने बताया कि गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण वे पहले ही बिजली पर निर्भर हो गए थे, लेकिन अब बढ़े सरचार्ज ने उन्हें फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि दुकान और घर दोनों का बिजली खर्च जोड़ने पर मासिक बजट तेजी से ऊपर जा रहा है। जानकार मानते हैं कि जब उपभोक्ता एक ईंधन से दूसरे पर शिफ्ट करता है, उसी समय दरों में बढ़ोतरी हो जाए तो इसका असर सीधा घरेलू अर्थव्यवस्था पर डबल शॉक की तरह पड़ता है।
विभागीय जानकार बताते हैं कि अभी आप एक यूनिट बिजली के लिए सात रुपये चुकाते हैं तो 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज जुड़ने के बाद इसकी प्रभावी लागत करीब 7.70 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। यानी हर यूनिट पर लगभग 70 पैसे अतिरिक्त खर्च पड़ेगा।