जहां सरकार एक तरफ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है वहीं जिम्मेदार सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगे हुए हैं। नए शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 22 दिन बीत चुके हैं, मगर अब तक कई ऐसे विद्यालय हैं जहां ताला लटक रहा है। जोगिया ब्लॉक का पूर्व माध्यमिक विद्यालय नदवलिया इसकी नजीर है।
कई वर्षों से इस विद्यालय पर ताला लटक रहा है। कुछ बच्चे प्राइवेट विद्यालयों का सहारा ले रहे हैं तो कुछ इधर-उधर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। विद्यालय बंद रहने से ग्रामीणों में रोष है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी बच्चों को साक्षर बनाने का दावा फेल होता नजर आ रहा है।
वर्ष 2007-08 में विद्यालय भवन का निर्माण हुआ था। लाखों की लागत से बना यह विद्यालय निर्माण के बाद से मात्र दो वर्ष ही संचालित रहा। वर्षों से बंद पड़े इस विद्यालय भवन की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है।
गांव में जब विद्यालय का निर्माण हुआ तो लोगों में शिक्षा के प्रति एक उम्मीद जगी मगर यह विद्यालय विभागीय उपेक्षा का ऐसा शिकार होकर रह गया है। आठ वर्षों से विद्यालय पर कोई झांकने तक नहीं आ रहा है। देख-रेख के अभाव में विद्यालय का चारदीवारी व खिड़कियां टूट चुकी हैं।
शौचालय का दरवाजा टूट चुका है। ग्रामीण इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। विद्यालय संचालित कराने के लिए ग्रामीणों ने कई बार विभाग को अवगत कराया, मगर स्थिति जस की तस बनी हुई है। मोहमम्द इद्रीश, नफीस अहमद, शत्रुघ्न यादव, राम उजागिर, रामदेव गुप्ता, इब्रान अख्तर, मजीबुर्रहमान, मक्की हसन आदि ने विद्यालय भवन की मरम्मत कराकर शिक्षा व्यवस्था बहाल काराने की मांग की है।