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Siddharthnagar News: सीजन शुरू होते ही शुरू कर देते हैं नकली खाद बनाने का धंधा

Sun, 29 Oct 2023 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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वर्जन नहीं है
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फोटो- है
जिले में पहले भी हो चुका है नकली खाद बनाने का भंडाफोड़
इटवा और डुमरियागंज में बने पैमाने पर होता है नकली खाद और जिंक बनाने का कार्य

इटवा थाना क्षेत्र के परसा चौराहे पर नकली खाद बनाने वाली फैक्टरी का हुआ था भंडाफोड़
डीएम के आदेश पर इटवा थाना में दर्ज हुआ मुकदमा

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। नकली खाद बाजार में उतारकर किसानों को ठगने के मामले का शुक्रवार रात को कृषि विभाग और राजस्व की टीम ने खुलासा किया। बड़ी मात्रा में खाद बनाने वाली सामग्री और तैयार की गई नकली खाद की खेप को पकड़ी गई थी।
यह नया मामला नहीं है। यहां सीजन शुरू होने से पहले ही नकली डीएपी, जिंक और अन्य खाद बनाने का धंधा शुरू हो जाता है। नकली खाद को असली के बीच में खपाकर किसानों को लूटा जाता है। क्योंकि जिले में पहले भी नकली खाद का गोदाम और नकली बीज बनाने का मामला सामने आ चुका है। इनमें केस भी दर्ज हुआ। पर कार्रवाई बेनतीजा रही है। लोगों के मुताबिक, जिसने पकड़ा, उसी ने असली होना बताते हुए क्लीनचिट दे दी थी।
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सूत्रों के मुताबिक रुपये के खेल से यह धंधा चलता है। अगर कार्रवाई और जांच सही से हो तो इटवा और उससे सटे इलाके में बड़ी खेप पकड़ी जा सकती है। यह कार्रवाई तो एक नमूना है। यह छोटा धंधेबाज है। बड़े-बड़े लोग इस मिलावटी के धंधे में संलिप्त हैं। वे हर साल अन्नदाताओं की जेब से करोड़ों रुपये उड़ा लेते हैं।
इस मामले में फैक्टरी चलाने वाले पर पुलिस ने जिला कृषि अधिकारी के तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी मुहम्मद मुजम्मिल ने बताया कि इटवा थाने में तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।



पूरे क्षेत्र में बिकती है नकली खाद

इटवा थाना क्षेत्र के परसा चौराहे पर शुक्रवार को नकली उर्वरक व जिंक की पकड़ी गई फैक्ट्री मात्र इटवा तहसील क्षेत्र की छोटी इकाई है। साथ ही पकड़ा गया व्यापारी एक छोटा सा प्यांदा है। जबकि इटवा में इससे बड़े-बड़े धंधेबाज हैं। इनका एकमात्र कार्य नकली डीएपी व पोटाश बनाना है। इसको बनाने के लिए राॅ मैटेरियल बड़े उर्वरक व्यापारी ही उपलब्ध कराते हैं। जैसे 20-20.0, सुपर दाना, 12-32-16 आदि की नकली खाद बनाने वाले व्यापारी खरीद करके डीएपी के बोरे में भरकर बेचते हैं। प्राय: यह सप्लाई रात में दुकानदारों के यहां थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करते हैं। यह एक या दो दिन में बिक जाता है।

गोदाम सील, केस दर्ज, आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई

लगभग दो वर्ष पूर्व इटवा के ही आपूर्ति करने वाले ऐसे कई व्यापारी पकड़े गये और उनके गोदाम भी सील किए गए। परन्तु परदे के पीछे हुई बातचीत के बाद पुन: सील खोल दी गई और कृषि विभाग ने रिपोर्ट दे दी कि बरामद उर्वरक सही पाया गया। आज स्थिति यह है कि इटवा तहसील क्षेत्र में आधे से अधिक दुकानें नकली डीएपी व तीन-चार को छोड़कर शेष सभी नकली पोटाश से भरी हैं। इनके यहां नकली उर्वरक धड़ल्ले से बिक रहा है।



इटवा क्षेत्र में पकड़ा गया था नकली बीज

एक वर्ष पहले ही इटवा क्षेत्र के एक गोदाम में कृषि विभाग की ओर से छापा मारा गया था। मौके पर धान के बीज के विभिन्न ब्रांड के पैकेट, खुला धान और पैकिंग धान, बीज पैक करने वाला बोरा आदि मिला था। इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। सेटिंग के खेल में मामले कुछ दिन बाद दब गया था।



खुद को कोसकर रह जाते हैं किसान

नकली खाद के प्रयोग से फसल कमजोर हुई। इसके बारे में किसानों को जानकारी नहीं हो पाती है। फसल कमजोर हुई तो यह खाद विक्रेता से मिलने और शिकायत करने की बजाय किस्मत का कोसते हैं। संतोष करके बैठ जाते हैं। जबकि शिकायत के लिए आगे आएं तो नकली खाद और बीज देने वाले पकड़े जाएं। पर वे ऐसा करते नहीं हैं। सिसवा गांव निवासी किसान सूर्यप्रकाश, सोमनाथ तिवारी ने कहा कि पकड़े जाने पर विभाग की ओर से कार्रवाई की बजाय समझौता कर लिया जाता है।
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नकली खाद तैयार करने वाले पर दर्ज हुआ केस

जिलाधिकारी के आदेश और जिला कृषि अधिकारी की शिकायत पर इटवा पुलिस ने नकली खाद बनाने वाली फैक्टरी चलाने वाले जमीरुल्लाह के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। गोदाम को सील कर दिया गया है। अब पुलिस यह जांच करेगी कि खाद बनाने की कौन-कौन सामग्री कहां-कहां से लाई जा रही थी। बनाने में और दुकानों तक सप्लाई करने में कौन-कौन शामिल हैं। दुकानदारों से यह किस प्रकार से सौदा करते हैं। जांच के आधार के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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