फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहर सूखी, किसानों की आस टूटी

Sun, 31 Jan 2016 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
कहने को तो डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में नहरों का जाल बिछा है, इसके बावजूद क्षेत्र के किसान बेहाल हैं। करीब तीन दशक पूर्व बुद्ध की धरती पर सरयू नहर परियोजना का शुभारंभ हुआ।
विज्ञापन


सालों बीत गए, लेकिन शासन ही महत्वाकांक्षी योजना अब तक अपने मकसद में कामयाब नहीं हुई। कारण स्पष्ट है जब नहर में पानी नहीं है तो खेतों में पानी कैसे पहुंचेगा।

किसानों का आरोप है कि नहर निर्माण में करोड़ों रुपये तो बह गए, लेकिन इसमें खेती के लिए पानी जरूरत के समय नहीं आता।

सरयू नहर खंड तीन के अंतर्गत भनवापुर क्षेत्र के माइनर डोमसरा-राउतडीला नहर इसकी नजीर है। 20 साल पूर्व बनी यह नहर अगर कभी भरती है तो सिर्फ बारिश की बूंदों से।
विज्ञापन


वर्ष 1994-95 में नहर खुदवाने के लिए किसानों ने अपनी कीमती जमीन कौड़ियों के भाव दिया था। सरयू नहर खंड तीन बलरामपुर की करीब 5 किमी लंबी डोमसरा-राउतडीला माइनर की खुदाई से किसान काफी खुश थे।

उन्हें आस थी कि नहर तैयार होने के बाद उसके पानी से वह अपने खेतों की सिंचाई आसानी से कर सकेंगे। दो दशक बीतने के बाद भी अभी तक नहर में एक बूंद पानी नहीं आया।

इससे नहर के सहारे सिंचाई की खेती करने वाले किसानों के माथे पर सूखती फसल देख बल पड़ने लगे हैं। किसान हरिश्चंद्र ने बताया कि माइनर सिल्ट से पूरी तहर से पटी हुई है।

नहर में बरसात के मौसम में कुछ जगह थोड़ा बहुत पानी दिखाई देता है, लेकिन वह नहर का नहीं बल्कि बारिश का पानी होता है। नहर में पानी के अभाव में फसल बर्बाद हो रही है।

क्षेत्र के बड़कू पांडेय, सुनील, हरिप्रकाश पांडेय और निक्कू श्रीवास्तव आदि ने कहा कि खेतों की सिंचाई समय-समय पर न होने से इस साल गेहूं की पैदावार हर साल की अपेक्षा आधी नहीं हो पाएगी।
विज्ञापन


अगर नहर में जल्द से जल्द पानी नही छोड़ा गया तो संबंधित अफसरों का घेराव करने के साथ ही बेमतलब साबित हो रही नहर को पाट देंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें