सिद्धार्थनगर। पार्टी, समारोह या फिर दोस्ताें संग जाम लड़ाने के बाद गाड़ी की स्टीयरिंग संभालने वाले जानलेवा होते जा रहे हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाकर न सिर्फ अपने साथ बैठे लोगों के साथ खुद की जान जोखिम में डाल रहे हैं बल्कि दूसरे वाहन चालकों के लिए खतरा बन गए हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बीते पांच दिन में हादसे का शिकार हुए 27 लोग इलाज के लिए पहुंचे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इमरजेंसी में पहुंचे इन लोगों में 80 फीसदी नशे की हालत में मिले हैं और युवा हैं।
मेडिकल कॉलेज और कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से मिले सड़क हादसों के आंकड़े और केस की जांच में निकलने वाली हिस्ट्री में शराब की नशे में गाड़ी चलाकर लोग हादसे का शिकार हुए हैं। इनका इलाज करने में भी अस्पताल कर्मियों को कठिनाई हो रही है।
कोई नशे में होने के कारण बेहोश है, जिसकी वजह से वह यह नहीं बता पा रहा है कि कहां चोट लगी है तो कोई होश में होते हुए भी बहकी-बहकी हरकत करके हाथ-पैर पटक रहा है। इसे मैनेज करने में जहां स्वास्थ्यकर्मी परेशान हो रहे हैं। वहीं, परिवार को जानकारी देने और इलाज के लिए उनके होश में आने का इंतजार करना पड़ रहा है। सड़क पर तेज रफ्तार और शराब का खतरनाक मेल अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में शराब का सेवन सिर को और गर्म कर दे रहा है। ऐसी हालत में वाहन चलाना खतरनाक साबित हो रहा है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड से मिले आंकड़ों के मुताबिक यहां हर 24 घंटे में पांच-सात एक्सीडेंट से जुड़े मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें चार-छह मामलों में चालक शराब के नशे में पाए गए हैं।
पांच दिन में पहुंचे 27 मामलों में अधिकांश यहीं से इलाज करवाकर गए तो कुछ को गंभीर होने के कारण रेफर करना पड़ा। हालत यह है कि नशे में घायल होकर आने वाले मरीजों का इलाज करना सामान्य मरीजों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
कई मरीज अपनी पहचान तक नहीं बता पाते जबकि कुछ इलाज के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की बात सुनने और निर्देशों का पालन करने की स्थिति में नहीं होते। इससे प्राथमिक उपचार, जांच और परिजनों तक सूचना पहुंचाने में भी काफी समय लग जाता है।