सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी के बीच जिले के ड्राइवर इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर चिलचिलाती धूप में घंटों वाहन चलाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गर्मी के कारण सवारियां कम निकलने से उनकी आमदनी पर भी असर पड़ा है। इससे न सिर्फ शारीरिक थकान बढ़ रही है, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
बस, ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि दोपहर के समय लोग घरों से कम निकल रहे हैं, जिससे सवारियां घट गई हैं। एक ऑटो चालक शकील ने बताया, पहले जहां दिनभर में अच्छी कमाई हो जाती थी, अब गर्मी के कारण सवारियां कम मिल रही हैं। ऐसे में ज्यादा समय तक सड़क पर रहना पड़ता है, जिससे थकान भी बढ़ती है।
वहीं एक बस चालक रामलाल ने कहा, गर्मी में यात्रियों की संख्या घट जाती है, लेकिन ड्यूटी उतनी ही लंबी रहती है। इससे कमाई और मेहनत का संतुलन बिगड़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में लंबे समय तक काम करने से हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ जाती है। स्थानीय चिकित्सक डॉ. अजय सिंह बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी, चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण ड्राइवरों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन चलाने पर प्रतिक्रिया समय कम हो जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
गर्मी के कारण रात में भी पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। ऊंचा न्यूनतम तापमान ड्राइवरों की नींद को प्रभावित कर रहा है, जिससे अगले दिन उनींदापन और थकान बनी रहती है। लगातार काम और कमाई का दबाव उन्हें आराम करने का मौका भी नहीं देता।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि कम सवारियों के कारण कई ड्राइवर ज्यादा ट्रिप करने की कोशिश करते हैं, जिससे जल्दबाजी बढ़ती है और जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।