चारों तरफ दीपावली की धूम। ऐसे में नटखट बच्चे भला पीछे कैसे रहे। नए-नए कपड़े पहनकर बच्चों ने गली मोहल्ले में पटाखे व फुलझड़ी छोड़कर धमाचौकड़ी मचाई।
अंधेरे पर उजाले की जीत का पर्व दीपावली पर शहर से लेकर गांव तक बिजली की झालरों, मोमबत्ती, मिट्टी के दीये से रोशन मनमोहक दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।
इस वर्ष भले ही दीप पर्व में पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद भी सनातन धर्म के लोग अपने-अपने अंदाज में पर्व को संजीदगी के साथ मना रहे हैं। हर तरफ खुशी और भीड़ से मेले जैसा माहौल रहा। इस मौके पर बच्चों ने भी अपने दिल की भावनाओं को बयां किया।
वासु ने बताया कि उसने जलती हुई फुलझड़ी का मजा जमकर लिया। मैंने पहली बार पापा के साथ बिना किसी हिचक के हाथों में जलती हुई फुलझड़ी लेने के बाद अच्छा महसूस किया।
एंजेल ने कहा कि दीप पर्व में आतिशबाजी करने की परंपरा पुरानी है। हम लोगों ने मम्मी-पापा के साथ पटाखा का मजा लिया। देखकर अच्छा लगा, लेकिन पटाखे की आवाज से डर लगा। वंशिका ने बताया कि रोज ऐसा पर्व आए तो बड़ा मजा आएगा।
हर दिन मम्मी-पापा मीठा खाने के लिए मना करते हैं। दीपावली के दिन खूब मिठाई खाई। आस्था ने बताया कि घर और आंगन को दीपावली की शाम को मम्मी के साथ दीप जलाकर घर में उजाला किया। मुझे जलते हुए दीये की रोशनी देखकर अच्छा लगा। विशाल ने बताया कि पटाखा फोड़ने का मजा ही कुछ और है।
अमीषा ने कहा कि आसमान में उड़ते रॉकेट की आतिशबाजी कर आनंद लिया। मैंने अपनी छोटी बहन के साथ पटाखा फोड़ा। आयुष ने बताया कि पापा के साथ घर की छत पर खूब पटाखा फोड़ा। जलता हुआ अनार देखकर मुझे बड़ा मजा आया।