सिद्धार्थनगर। बेहद कड़े मुकाबले में जिलाध्यक्ष के पद पर रामकुमार राय
कुंवर की ताजपोशी के जरिए भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समीकरणों को साधने की
कोशिश की है।
सबका साथ-सबका विकास की झलक भी इस व्यूह में नजर आ रही है।
पार्टी ने बिना किसी धड़े को असंतुष्ट किए ऐसे नाम को चुना है, जिस पर कोई
आपत्ति नहीं है।
वरिष्ठता और अनुभव को प्राथमिकता देते हुए विधानसभा चुनाव
में टिकट वितरण की जातिगत रणनीति को भी स्पष्ट किया है।चुनावी वर्ष में
जिलाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा में दावेदारों की फौज खड़ी हुई थी। चयन
समिति के समक्ष कुल 15 लोगों ने दावेदारी पेश की थी।
हर नाम के साथ
दिग्गजों की पैरवी थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिले के दो जनप्रतिनिधि
अपने करीबियों को जिलाध्यक्ष पद पर काबिज कराने में लगे हुए थे। एक गुट की
पसंद दिलीप चतुर्वेदी थे तो दूसरा खेमा ईश्वरचंद दुबे को चाहता था।
कार्यकर्ताओं की राय उनसे जुदा थी।
पार्टी के ज्यादातर कार्यकर्ता चुनावी
वर्ष में मौजूदा अध्यक्ष को ही मौका देने के पक्षधर थे, मगर खुद की चुनाव
लड़ने की इच्छा के कारण जिलाध्यक्ष जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे।
ऐसी
परिस्थितियों में पार्टी ने सभी धड़ों में सामंजस्य स्थापित करते हुए
रामकुमार राय कुंवर के नाम पर मुहर लगाई है। रामकुमार की ताजपोशी कई मायनों
में खास है। पहला, पार्टी के अंदर कोई सीधा विरोधी नहीं है। दो बार
महामंत्री के रूप में जिला संगठन का लंबा अनुभव भी रह चुका है।
कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से जुड़ाव भी है। मौजूदा समय में वह सुशासन
प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं, ऐसे में शीर्ष नेताओं के भी सीधे
संपर्क में हैं। संगठन में अच्छी पकड़ का ही कारण पार्टी ने गोरखपुर नगर
इकाई के चुनाव के लिए सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी।
शिक्षक रह
चुके रामकुमार नेतृत्व के मंसूबों पर कितना खरा उतरते हैं यह तो समय
बताएगा। मगर एक बात तो साफ है कि आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी
ने बिसात बिछानी तेज कर दी है।