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जोखिम पूर्ण प्रसव के मामलों में बढ़ी सक्रियता

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खून की कमी से जोखिमपूर्ण हो रहे हैं प्रसव
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हीमोग्लोबिन की कमी होने से गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त
जनपद में 19788 गर्भवती महिलाओं की जांच में 6531 एचआरपी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जनपद में हीमोग्लोबिन की कमी होने के कारण गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो रही हैं। इस कारण प्रसव के दौरान बच्चे या मां की जान को खतरा बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को नियमित आयरन का टीका दिया जा रहा है, ताकि उनके एचबी का स्तर सुधारा जा सके। साथ ही चिकित्सक उन्हें नियमित रूप से पौष्टिक खुराक लेने की सलाह दे रहे हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत महिला अस्पताल में प्रत्येक माह की नौ तारीख को विशेष शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। इनमें जोखिम पूर्ण प्रसव के मामले चिह्नित कर विशेष सतर्कता बरती जाती है। गंभीर मामलों में उच्च श्रेणी के अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहें। जिले में इस अभियान की शुरूआत 2019-20 से शुरू हुई। पीएमएसएमए दिवस के दौरान वर्ष 2019-20 में 4444 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई, जिसमें 1330 एचआरपी (हाई रिस्क प्रिगनेंसी) पाई गई। प्रसव के ये मामले जोखिमपूर्ण थे। इसी प्रकार वर्ष 2020-21 में 14008 में 4454, इस वर्ष मई से जून तक 1336 में 748 गर्भवती एचआरपी मिली हैं। इन महिलाओं को नियमित रूप से आयरन और कैल्शियम की निशुल्क दवाएं दी रही हैं। जनपदीय परामर्शदाता मातृत्व स्वास्थ्य प्रमोद कुमार संत के अनुसार गर्भवती महिलाओं में सामान्य रूप से 10 से ज्यादा एचबी होना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान सही खानपान नहीं लेने के कारण ही गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की शिकायतें आ रही हैं। उनके अनुसार महिलाओं को रोजाना की डायट पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि बच्चे के विकास में कोई कमी न आए।
लोहे की कढ़ाई में बना भोजन करें गर्भवती
महिला चिकित्सक डॉ. आफरीन अतहर बताती हैं कि गर्भवती महिलाओं के एनीमिया ग्रस्त होने से पेट में पल रहे बच्चे की वृद्धि पर असर होता है। ऐसे में बच्चे के विकास के लिए पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाएगा। प्रसव के दौरान प्रसूता में अगर रक्त स्तर कम हो या रक्त प्रवाह ज्यादा हो जाए तो मां और बच्चे की जान खतरे में पड़ सकती है। समय रहते एनीमिया को ठीक न किया जाए तो बच्चे को भी एनीमिया की शिकायत हो सकती है। महिला चिकित्सक डॉ. ममता गुप्ता कहती हैं कि गर्भवती महिलाओं को गर्भकाल के पहले माह से ही हीमोग्लोबिन की जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं को रोजाना लोहे की कढ़ाई में बने खाने का सेवन करना चाहिए। लोहे में मौजूद आयरन के तत्व खाने में शामिल हो जाते हैं, इससे शरीर को आयरन मिलता है। इससे खून का स्तर बढ़ता है।
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महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने के लिए चलाए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए कैंप लगाया जाता है। कैंप में महिलाओं का एचबी, बीपी, यूरिनल, शुगर, एचआईवी, एचसीवी और अन्य टेस्ट भी कराए जाते हैं।
डॉ. संदीप चौधर, मुख्य चिकित्साधिकारी
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