सिद्धार्थनगर। जिले में डीएपी खाद का संकट कम नहीं हो रहा है। एक बोरी के लिए किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों के कान का जूं नहीं रेंग रहा है। इसके कारण रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है। यहीं हाल रहा तो उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
धेंसा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्रीय सहकारी समिति कटहना में एक सप्ताह पहले 300 बोरी डीएपी खाद आई थी। भीड़ अधिक होने के कारण किसानों को एक और दो बोरी डीएपी वितरित किया गया। इसके बाद समिति पर डीएपी खाद का आवंटन नहीं हुआ। जिसके कारण किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्राइवेट दुकानों पर डीएपी नहीं मिलने सुपर फास्फेट भी छह सौ रुपये बोरी की दर से बिक्री कर रहे हैं। क्षेत्र के पलिया टेकधर, पलिया निधि, साहा, सिरवंत, कपिया, बनरही, मनोहरी, सेबुई, लखनपारा आदि गांवों के सैकड़ों किसान सहकारी समिति कटहना का चक्कर लगा रहे हैं।
किसानों को एक दो दिन में डीएपी खाद आने की बात कहकर टाल दिया जाता है। जबकि कृषि विभाग की ओर से डीएपी की कमी न होने का खोखला दावा किया जा रहा है। खाद की कमी से समय से गेहूं की बुआई नहीं हो रहा है।
जिसके कारण खेत की नमी सूख रही है। अधिकांश किसानों को खेत का पलेवा भी करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय किसान कृष्ण कुमार यादव, प्रदीप कुमार, राम कुमार पाण्डेय आदि लोगों ने सहकारी समिति कटहना में डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। सचिव से संपर्क किया गया तो कहा कि निर्माण कार्य चल रहा है, इसी कारण खाद स्टोर करने में समस्या उत्पन्न हो रही है।