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अब खाकी को भी ढाल बना रहे साइबर ठग

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अब खाकी को भी ढाल बना रहे साइबर ठग
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- सीओ और इंस्पेक्टर की फेसबुक को क्लोन करके मांग रहे रकम
- पांच दिन के भीतर दो इंस्पेक्टर की आईडी क्लोन करके मांग चुके हैं रुपये
- बढ़ता हुआ साइबर अपराध लोगों के लिए बना चिंता का विषय
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। जनता की सुरक्षा और अपराधियों पर कार्रवाई करने वाली खाकी को ही साइबर अपराधी अब ढाल बनाकर ठगी करने में जुट गए हैं। साइबर अपराधी आरक्षी नहीं बल्कि सीओ और इंस्पेक्टर की फेसबुक आईडी को क्लोन करके सोशल मीडिया के प्लेटफार्म मैसेंजर के जरिए रकम की डिमांड कर रहे हैं। इसमें हादसा होने की बात बताते हुए रकम की मांग करते हैं और अपनी बातों में उलझाकर रुपये मंगाने की कोशिश करते हैं। कुछ मामले सामने आने के बाद साइबर सेल सक्रिय हुई है।
साइबर ठग सब चंद मिनट के खेल में रुपये मंगाकर अपना काम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। फेसबुक आईडी क्लोन होने के बाद ही तत्काल उनका मैसेंजर पर मैसेज आता है और बिना देरी लगाए ही वे चैट करने लगते हैं। जरूरतमंद की मदद के आधार पर रुपये की डिमांड करते हैं। ऐसे में जितनी जल्दी आप उनके झांसे में आएंगे, उतनी ही तेजी से आपको अपना शिकार बना देंगे। जब खाकी को ढाल बना रहे हैं तो कैसे कोई सुरक्षित रहे यह बड़ा सवाल है। ऐसे में खुद सजग और सावधान रहने की जरूरत है। सीओ और इंस्पेक्टर की आईडी को क्लोन करके रुपये की मांग का मामला सामने आया है। एएसपी सुरेशचंद रावत ने बताया कि सोशल मीडिया से होने वाले अपराध पर कार्रवाई होती है। साथ ही साइबर ठगी के मामले में भी केस दर्ज करके कार्रवाई की जाती है। संवाद
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एसओ की आईडी क्लोन करके साथी से मांग रुपये
तत्कालीन एसओ चिल्हिया रहे सभाशंकर यादव की फेसबुक आईडी को साइबर ठगों ने क्लोन कर लिया। इसके बाद कई लोगों से मैसेज करके रुपये की डिमांड की। जब उन्हें मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने अपनी आईडी तत्काल बंद कराई।
सीओ की आईडी क्लोन करके मांगें 15 हजार
सीओ डुमरियागंज अजय कुमार श्रीवास्तव की कुछ दिन पूर्व साइबर ठगों ने आईडी क्लोन कर ली। इसके बाद उनका हाल चाल जाना। फिर समस्या बताते हुए 15 हजार रुपये की डिमांड की। वे मामले का समझ गए और तत्काल आईडी को बंद करवा दिए। पता पूछने की कोशिश किए, लेकिन उसने जानकारी नहीं दी।
इंस्पेक्टर की आईडी से मांग रुपये
प्रभारी निरीक्षक चिल्हिया दिनेशचंद चौधरी की आईडी को क्लोन करके 20 मई को एक पत्रकार से समस्या बताते हुए ठगों ने 15 हजार रुपये की मांग की। दूसरे दिन वापस कर देने की बात भी कही, लेकिन शक होने पर जब इंस्पेक्टर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आईडी को वे तत्काल बंद करवा दे रहे हैं। इससे पहले भी उनकी आईडी क्लोन की जा चुकी है।
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर की आईडी से मांगी रकम
क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर विनोद राव की आईडी से 25 मई को मैसेंजर के जरिए एक व्यक्ति से रुपये की मांग की है। नंबर भेजकर रुपये उसी भेजने के लिए कहा गया। जब इंस्पेक्टर से बात हुई तो उन्होंने बताया कि रात में ही कुछ और लोगों को मैसेज भेजकर रुपये की मांग की गई। साइबर सेल से बात करके आईडी को बंद करवा दिए।
फ्रेंड रिकवेस्ट करते हुए आ जाते हैं मुद्दे पर
साइबर ठगों को पहचानने के लिए अच्छा तरीका है। क्योंकि आम व्यक्ति जब फ्रेंड रिकवेस्ट भेजता है तो वह मैसेंजर पर तत्काल मैसेज नहीं करता है। जबकि साइबर ठक तत्काल मैसेंजर पर मैसेज करते हैं। चंद मिनट में आपनी बात को रखेंगे अगर झांसे में आ गए तो ठगी का शिकार होना तय है।
गूगल और फोन पे पर मांगते हैं रकम
अगर आपके पहचान का कोई है और उसे जरूरत है तो वह फोन करके आपसे सहायता मांगेगा। न की मैसेंजर के जरिए मांग करेगा। साथ ही गूगल और फोन पे के जरिए रकम नहीं मांगेगा। जबकि साइबर ठग इसी प्रकार से रुपये मांगते हैं। इसलिए इस प्रकार के मैसेज से सावधान रहें।
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इस प्रकार से अपराधियों से बचें
किसी अनजान व्यक्ति द्वारा फेसबुक पर भेजे गए फ्रेंड रिकवेस्ट को स्वीकार न करें और अगर पूर्व के पहचान का कोई व्यक्ति फ्रेंड रिकवेस्ट भेजता है तो जांच परख लें। इसके बाद ही उसे स्वीकार करें। अन्यथा साइबर ठग अपने जाल में फंसा सकते हैं। साथ ही अगर कोई मैसेंजर के जरिए किसी की आईडी से रुपये मांग रहा है तो संबंधित व्यक्ति से बात करें और उसे जानकारी दें, जिससे कोई दूसरा ठगी का शिकार होने से बच सके। अगर स्वंय की आइडी क्लोन होती है तो उसे तत्काल बंद करवाएं। कई बार जिसे आप अपना परिचित समझकर फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करते हैं, उसे हैंडिल करना वाला जालसाज होता है।
दिलीप कुमार द्विवेदी सर्विलांस और साइबर के जानकार।
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