खेसरहा। बांसी तहसील क्षेत्र के बांसी-बेलौहा मार्ग पर सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर बॉर्डर पर स्थित चूटी पुलिया हादसे का स्पाट कहा जाता है। कारण यहां पर अक्सर हादसे हो रहे हैं। अंधा मोड और डिवाइडर विहीन पुलिया इसके पीछे की वजह है। एक तरफ से आने वाले वाहन चालक को दूसरा नहीं दिखाई पड़ता। कुछ टकराकर तो कुछ सड़क के नीचे खाई में गिरकर घायल और जान गवां देते हैं।
यहां हर माह इस स्थान पर पांच से सात हादसे होते हैं। जून माह में एक सप्ताह में चार हादसे में चार लोगों की जान चली गई और पांच जख्मी हो गए थे। जिससे चूटी पुलिया चर्चा में आ गई थी। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो उसे ब्लैक स्पाॅट घोषित किया गया और न ही डिवाइडर न लगाया गया संकेतक लगाया। जिससे ठंड में इस मौत के स्पाट पर घटनाओं की संभावना और बढ़ गई है। क्योंकि कोहरे में दिखाई न पड़ेगा, इससे कोई खाई में गिरेगा तो कोई टकरा जाएगा। वहीं, स्थानीय लोगों ने जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
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यह है पुलिस का लोकेशन और इस कारण होते हैं हादसे
खेसरहा क्षेत्र के सोरवा गांव के पास यूटी पुलिया आवागमन के दृष्टि से बेहद खास है। बांसी से बेलौहा, नन्दौर व खलीलाबाद से होते हुए गोरखपुर तक आने-जाने के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में बस, ट्रक व छोटे वाहनों का आवागमन होता है। आवाजाही को देखते हुए विभाग ने 2020 में इस सड़क को सात मीटर चौड़ी तो कर दिया, लेकिन पुलिया का निर्माण नहीं कराया। यहां सड़क के सापेक्ष पुलिया संकरी है और पुलिया के दोनों तरफ तीव्र मोड़ है। दोनों तरफ से आने वाले वाहन ठीक से मुड़ नहीं पाते हैं, जिसकी वजह से आमने-सामने की गाड़ियां टकरा जाती हैं और दुर्घटना की शिकार हो जाती हैं। आए दिन होने वाले इन हादसे से लोगों में आक्रोश है लेकिन जिनके कंधों पर जिम्मेदारी है, वे बेफ्रिक बने हुए हैं।
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हादसों पर एक नजर
जून माह में चूटी पुलिया पर मोड़ के कारण बस व टैंपो में टक्कर हो गई। इस हादसे में खेसहा थाना क्षेत्र के बजवा निवासी बुधिराम गुप्ता की मौत हो गई थी। वह बांसी से किराना का सामना लेकर बेलौहा जा रहे थे। पांच जून को चिल्हिया थाना क्षेत्र कटया गांव निवासी जितेन्द्र वरुण कार से अपने माता-पिता के साथ बेलौहा से बांसी की तरफ जा रहे थे। पुलिया पर पहुंचते बेलहर थाना निवासी आदिल की कार से टकराई। इस हादसे में एक की मौत हो गई। जबकि, पांच लोग घायल हो गए। इसके तीसरे दिन हुए हादसे में बाइक सवार दो लोगों की मौत की बात सामने आई थी।
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दिसंबर 2022 में हुआ था बड़ा हादसा
इसी जगह पर 29 दिसंबर 2022 को एक निजी कंपनी के 40 कार्यकर्ता निजी बस लेकर बांसी से गोरखपुर मीटिंग में जा रहे थे। इस जगह पर तीव्र मोड़ होने के वजह से बस अनियंत्रित होकर बोस फीट नीचे गड्ढे में गिर गई थी। इसमें चीस लोगों को गंभीर चोटें आई थीं। मौके पर पहुंचे एसडीएम व सीओ ने घायलों को बांसी व खेसरहा के अस्पताल में भर्ती कराया था। उस समय यहां के क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन के सामने पुलिया की दोनों तरफ ब्रेकर व सांकेतिक बोर्ड लगवाने को लेकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अफसरों ने अनसुना कर दिया।
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ठंड में बढ़ जाते हैं सड़क हादसे
ठंड का मौसम आने के बाद हादसों की संख्या में इजाफा हो जाता है। कारण कोहरे के कारण सामने दिखाई नहीं पड़ता है। इस वजह से हाईवे पर हादसे होने लगते हैं। यह तो अंधा और खतरनाक मोड है, जहां एकदम दिखाई नहीं पड़ता है। प्रतिदिन इस मार्ग से एक हजार से अधिक छोटे और बड़े वाहनों का आवागनम होता है। ऐसे में ठंड में यहा पर हादसों की संभावना बढ़ जाएगी। जहां हर माह औसत में पांच से सात बड़े हादसे होते हैं, उसकी संख्या बढ़ जाएगी। अगर इस पर समय रहते कोई ठोस कदम उठा लिया जाएगा तो हादसों से बचा जा सकता है।
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बोले लोग
पुलिया के दोनों तरफ तीव्र मोड़ बहुत खतरनाक है। यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती है। इसके बचाव के लिए कई बार पीडब्ल्यूडी विभाग से पुल के दोनों तरफ ब्रेकर बनवाने की मांग किया गया था लेकिन अबतक नहीं बना।
-भगवान यादव, क्षेत्रीय नागरिक
सड़क चौड़ीकरण के साथ पुलिया का भी निर्माण हो गया होता तो यहां होने वाली घटनाएं नहीं होती। अब तो सड़क के दोनों तरफ झाड़ियां होने से पुलिया नहीं दिखाई देती है। यहां काफी लोगों की दुर्घटना में मौत हो चुकी है, लेकिन विभाग इसको रोकने के लिए कोई उपाय नहीं कर रहा है।
-शिवेंद्र द्विवेदी, क्षेत्रीय नागरिक