संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। रबी सीजन की शुरुआत होते ही बुवाई के लिए खेत तैयार हैं, लेकिन समय से खाद न मिलने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कारण यह है कि खेतों से लगातार नमी उड़ने के कारण खेत सूख रहें हैं, जिससे समय पर बुवाई नहीं हो पा रही है और किसान चिंतित हैं।
किसान आए दिन खाद के लिए साधन सहकारी समितियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समय से खाद न मिलने के कारण उन्हें मायूस लौट जाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि गेहूं, चना, मटर जैसी फसलों की बुवाई का यही उपयुक्त समय है, लेकिन खाद के बिना खेतों में बीज डालना जोखिम भरा साबित हो सकता है। उधर कई किसान लगातार उड़ रही नमी की कमी से खेत सूख जाने की बात भी कह रहे हैं।
खेतों में नमी की कमी के साथ ही खाद का न मिल पाना इस बार की बुवाई को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। क्षेत्र के गिरजापति, श्यामू साहनी, अष्टभुजा, जगदीश प्रसाद, रामदेव आदि किसानों का कहना है कि खाद के लिए साधन सहकारी समिति बिशुनपुर मुस्तहकम का कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने के कारण निराश होकर लौट आना पड़ रहा है। समिति पहुंचने पर सचिव द्वारा आज- कल खाद आने की बात कही जाती है, लेकिन एक सप्ताह से ऊपर हो गया, समिति पर डीएपी खाद नहीं पहुंची।
किसानों ने बताया कि यदि जल्द खाद नहीं मिली तो बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। खाद के अभाव में जूझ रहे किसान सरकार से तत्काल साधन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। ताकि रबी की बुवाई समय पर हो सके और फसल उत्पादन प्रभावित न हो।
निजी दुकानों पर अधिक दाम पर बिक रही खाद: किसानों का कहना है कि प्राइवेट दुकानों पर अधिक दामों पर 1600 से 1700 प्रति बोरी खाद की बिक्री की जा रही है। साथ ही एक बोरी खाद के साथ एक बोरी गेहूं की बीज लेने की शर्त रखीं जा रही हैं, जबकि सरकारी दुकानों पर एक बोरी गेहूं के बीज की कीमत 950 रुपये है।
क