जिला अस्पताल के कर्मचारियों पर बाहरी दबाव इस कदर हावी है कि वह मानवीय संवेदनाओं को भी दरकिनार करने में नहीं हिचकते।
यह तब देखने को मिला
जब शुक्रवार को मारपीट में बुरी तरह जख्मी किशोरी को विपक्षी पक्ष के एक व्यक्ति के दबाव में रेफर कर दिया गया। अस्पताल के बाहर घंटों तक दर्द से छटपटाती किशोरी को लेकर परिजन बैठे रहे। बाद में एक राजनीतिक दल के लोगों ने मौके पर पहुंच कर हो-हल्ला मचाया, तब करीब आठ घंटे बाद घायल किशोरी को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
कोतवाली जोगिया के ग्राम उदयपुर निवासी पीड़ित किशोरी कविता (14) के पिता अगमानंद ने बताया कि गुरुवार की रात करीब आठ बजे गांव की ही हमउम्र किशोरी से विवाद हो गया। इसी दौरान दूसरी किशोरी के परिजनों ने कविता को घसीट कर मारना शुरू कर दिया। पेट और छाती पर चोट आई। रात को नौ बजे पुलिस को मामले की सूचना देने के बाद पुत्री को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
सुबह सात बजे अस्पताल से भोजन लेने के लिए घर गया, इसी दौरान दूसरे पक्ष के साथ प्रधान के रिश्तेदार आए और डॉक्टर पर दबाव बना कर डिस्चार्ज करा दिए। मौके पर केवल घायल पुत्री और पत्नी ही थीं। दोपहर तक दोनों को लेकर वह अस्पताल में मदद के लिए भटकता रहा, मगर चिकित्साकर्मियों ने एक न सुनी। इस बीच किसी तरह जानकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक पहुंच गई। अस्पताल पहुंच कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनमानी का विरोध करते हुए शोर मचाना शुरू किया तो दोबारा किशोरी को भर्ती कर लिया गया।
इस संबंध में प्रधान के भतीजे अशोक कुमार यादव ने कहा कि पीड़ित किशोरी के परिजन बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। डॉक्टर पर कोई दबाव नहीं बनाया गया था।