सिद्धार्थनगर। देवरिया से गिरफ्तार किए गए फर्जी शिक्षक आदित्य सिंह ने एसटीएफ की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पूछताछ के क्रम में उसने बताया है कि पांच लाख रुपये में प्राइमरी में फर्जी शिक्षक नियुक्त किए जाते थे। डीएलएड और टीईटी की फर्जी कूटरचित मार्कशीट तैयार कर शिक्षकों की नियुक्ति की जाती थी। साथ ही उसने कुईचंवर के रहने वाले एक व्यक्ति का नाम भी बताया है, जो फर्जी शिक्षक का मास्टरमाइंड है। एसटीएफ अब उसकी तलाश में जुट गई है।
जिले में 38 शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद अब तक केवल पांच फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नौ न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब भी 24 फर्जी शिक्षकों तक पुलिस और एसटीएफ नहीं पहुंच पाई है। जबकि इनमें आधा दर्जन से अधिक शिक्षक महिला हैं। फिलहाल, रविवार को गिरफ्तार किए गए देवरिया के कुईचंवर के फर्जी शिक्षक आदित्य सिंह ने जो राज बताए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। एसटीएफ को पूछताछ में उसने यह बताया है कि प्राइमरी में शिक्षक के लिए पांच लाख रुपये लगते थे। इसमें टीईअी और डीएलएड कीफर्जी मार्कशीट तैयार कराई जाती थी। इसके बाद मनचाहे जिले में नियुक्ति मिल जाती थी। नियुक्ति ऐसे स्थानों पर दी जाती थी, जहां पर अधिकारियों का आना-जाना बेहद कम होता था। एसटीएफ के निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पूछताछ में कई राज खुलकर सामने आए हैं। जल्द ही अन्य फर्जी शिक्षकों सहित सरगना की गिरफ्तारी की जाएगी।
जिले का अध्यापक और लिपिक भी हैं गैंग में
पूछताछ में अब तक जो बात सामने आई है उसमें जिले के कई ऐसे अध्यापक और लिपिक भी शामिल हैं, जिनका फर्जी शिक्षकों के रैकेट से तगड़ा गठजोड़ है। जो बेहद कम समय में अकूत संपत्ति भी बना लिए हैं। माना जा रहा है कि यह संपत्ति फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के बाद से अचानक बढ़ी है। पूछताछ में आदित्य ने भी यह बात स्वीकार की है कि जिले में तैनात शिक्षक कई शिक्षक सरगना से मिलकर फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति करवाते थे। इनमें सलेमपुर का रहने वाला एक व्यक्ति है, जो मौजूदा समय में जिले के प्राइमरी विद्यालय में तैनात है।
नहीं होता था सत्यापन
पूछताछ के बाद यह बात भी सामने आई है कि जिन फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति होती थी। उनके सत्यापन में भी जमकर खेल खेला जाता था। यही वजह है कि 2016 में हुई नियुक्ति में करीब 500 से अधिक शिक्षकों का सत्यापन विभाग ने कराए ही नहीं थे। बाद में दबाव पड़ने पर किसी तरह सत्यापन कराया गया। लेकिन इससे पहले ही शिक्षकों के खातों में वेतन चला गया है।
जांच हो तो कई की फंस सकती है गर्दन
पूछताछ के बाद जो तथ्य अब तक सामने आए हैं, अगर सही तरीके से उस दिशा में पूछताछ की जाए, तो जिले के कई शिक्षक, बीएसए कार्यालय में तैनात कई लिपिक और पूर्व में रह चुके कई बीएसए सहित मौजूदा समय में तैनात कई बीईओं की गर्दन फंस सकती है।