इटवा। स्थानीय थाने से एके 47 गुम होने के मामले में पांच दिन बाद भी पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। पुलिस थाने का सामान शिफ्ट करने वाले मजदूरों, होमगार्ड जवानों व पुलिस कर्मियों के घर जाकर मामले की जानकारी ले रही हैं। लेकिन अब तक नतीजा सिफर रहा। वहीं, कार्रवाई में आरोपी बनाए गए ट्रेनिंग पूरी करने वाले सिपाही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिम्मेदारों ने उसे तैनाती मिलते ही हाईटेक असलहा थमा दिया। उसे ऐसे असलहे का जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है। बहरहाल मामले की जांच जारी है।
असलहा गुम होने के मामले में एसपी ने 25 हजार रुपये व आईजी जोन बस्ती आशुतोष कुमार ने बरामद करने वाले कर्मी को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की घोषणा की है। यही नहीं पूर्व में तैनात कुछ पुराने पुलिस कर्मियों को घटना का पर्दाफाश करने के लिए लगाया गया है, लेकिन अब तक पुलिस इस किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इस बीच पांच पुलिसकर्मियों का जेल जाना हर किसी को झकझोर रहा है। कस्बेवासियों का कहना है कि असलहे के गुम होने में 500 मीटर दूर सीएचसी इटवा के भवन में रह रहे तत्कालीन थानाध्यक्ष अथवा उन दोनों सिपाहियों का क्या कसूर है। फिलहाल मामले में यह बात सामने आई है कि मालखाने में असलहे को जमा कराया गया था। ऐसे में मालखाने से असलहा गुम होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं साजिश के तहत एके 47 को गुम किया गया है।
वहीं, मालखाने में विद्युत आपूर्ति बंद रहने पर अंधेरा रहने के कारण खिड़की खुली रहती थी और खिड़की के दो तीन मीटर बाद थाने की बांउड्रीवॉल व उसके बाद बहुत दूर तक निर्जन स्थान हैं। ऐसे में विभाग का मानना है कि हो सकता है कि मालखाने की खिड़की से असलहे को फेंक दिया गया हो और बाद में उसे वहां से ले जाया गया हो। सूत्र बताते हैं कि मालखाना प्रभारी मालखाने की चाबी असलहे को जमा व निकासी करने में चाबी देने में कभी किसी को देने में परहेज नहीं करता था। जिससे असलहे के रखरखाव की गोपनीयता भंग होती थी। सूत्रों की माने तो मालखाना प्रभारी औैर जेल गए एक हेड कांस्टेबल से काफी मनमुटाव था। ऐसे में शक की सुई दूसरी ओर भी घूम रही है। फिलहाल मामले में पुलिस पैनी निगाह रखे हुए है। सीओ पुलिस इटवा श्रीयश त्रिपाठी का कहना है कि असलहा बरामदगी के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही असलहे को बरामद कर लिया जाएगा।