सिद्धार्थनगर। जहरीली शराब से आजमगढ़ में 22 मौतों के बाद आबकारी विभाग फिर से हरकत में आ गया है। अवैध शराब के धंधे पर लगाम के लिए विशेष अभियान छेड़ने की हिदायत जारी हुई है। मगर यहां खुद आबकारी मंत्री के जिले में अवैध शराब की भट्ठियों को बंद करा पाने में विभाग नाकाम है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के दर्जनों गांवों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। विभाग भी इससे बखूबी वाकिफ है। इन गांवों को चिह्नित भी किया जा चुका है। इसके बावजूद इस धंधे को रोक पाने में विभाग विफल है। नेपाल से आने वाली शराब की खेप पर भी अंकुश की चुनौती बरकरार है। लगातार हो रही बरामदगी खुद इसकी गवाही दे रही है।
पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में कच्ची शराब का धंधा नासूर बना हुआ है। सिद्धार्थनगर भी उनमें से एक है। कई गांवों में फल-फूल रहे शराब के इस अवैध धंधे में पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। पुरुष सदस्यों के अलावा महिलाएं और बच्चे भी इस धंधे में लगे हुए हैं। जिले के एक विधायक के आबकारी मंत्री बनने के बाद आस थी कि इस धंधे पर प्रभावी ढंग से अंकुश लग सकेगा। करीब चार माह बाद भी कच्ची की भट्ठियों को पूरी तरह बंद कराने में महकमा नाकाम साबित हुआ है। उस्किया, छोटकी कनकटी, जोकइला, ओदनाताल, बहोरवा घाट, टेउंवा, भुतहवा, सेखुइया, अजमागढ़ सरीखे दर्जनों गांवों में कच्ची का कारोबार अभी भी चल रहा है। भट्ठियों पर तैयार की जाने वाली इस शराब से न सिर्फ मानव जीवन बर्बाद हो रहा है, विभाग को भी लाखों रुपये राजस्व की चपत लग रही है। बावजूद इन पर प्रभावी अंकुश लगा पाने में जिम्मेदार सफल नहीं हो सके हैं। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व तत्कालीन एसपी अजय साहनी ने ऑपरेशन मुक्तांगन शुरू कर इस धंधे पर प्रहार किया था, लेकिन उनके तबादले के साथ ही यह कोशिश भी ठप पड़ गई। जिला आबकारी अधिकारी नवीन कुमार सिंह का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार रोकने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पकड़े जाने वालों पर केस भी दर्ज हो रहे हैं। विभाग के पास संसाधन सीमित हैं, बावजूद बेहतर रिजल्ट का पूरा प्रयास हो रहा है। कच्ची शराब को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन व आबकारी की विशेष टीम भी गठित की गई है। छापेमारी अभियान निरंतर जारी है। इस धंधे को पूरी तरह बंद कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
चार विधानसभा क्षेत्र के 59 गांव चिह्नित
कच्ची शराब का गोरखधंधा जिले के चार विधानसभा क्षेत्र में जोरों पर है। मिश्रौलिया और उसका थाना क्षेत्र के कई गांव इसके लिए कुख्यात हैं। 12 थाना क्षेत्र के 59 गांवों में यह धंधा फलफूल रहा है। सबसे ज्यादा 19 गांव इटवा क्षेत्र के हैं। इतनी ही संख्या सदर इलाके में हैं। शोहरतगढ़ के 12 और बांसी के 9 गांव कच्ची के अवैध कारोबार के लिए चिह्नित हैं।