सिद्धार्थनगर। नगरपालिका परिषद सिद्धार्थनगर में 2011-12 से 2013-14 में जमकर वित्तीय अनियमितता हुई। ऑडिट में यह बात सामने आई है। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत शासन स्तर पर भी की है।
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका के जिम्मेदारों ने 2012-13 पालिका के पास मौजूद सात ट्रांसफॉर्मरों का उपयोग नहीं किया। मानक दरकिनार कर निविदा निकालकर आकाश इंटर प्राइजेज को 2014-15 में 21,89690 रुपये का भुगतान कर दिया। यह फर्म न तो ट्रांसफॉर्मर उत्पादक है और न ही किसी निर्माता फर्म की अधिकृत डीलर।
ट्रांसफार्मर क्रय किए जाने के दो वर्ष बात निविदा का कोरम पूरा किया गया। इसके साथ ही कानपुर की एक कंपनी को सीवर सेक्शन मशीन के नाम पर 54 हजार रुपये भुगतान किया गया। राम प्रसाद नगर में मुन्नू के घर से पूर्णवासी के मकान तक नाली तथा क्रासिंग के निर्माण में दो लाख 93 हजार400 रुपये का भुगतान कर दिया गया। वहीं ईओ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मामला काफी पुराना है। फाइल निकलवाई जाएगी। फाइल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
तीन दुकानों का कर दिया आवंटन ः आरोप है कि ट्रांसफॉर्मर की सप्लाई करने वाली फर्म को नगरपालिका के ईओ और पूर्व अध्यक्ष ने नियमों को दरकिनार कर नगरपालिका की तीन दुकानें आवंटित कर दी। ये दुकानें महिलाओं के नाम से हैं। चर्चा है कि इसके एवज में मोटी रकम ली गई। चूंकि जिन दुकानों का आवंटन हुआ है, वह मुख्य चौराहे पर हैं।
लखनऊ तक पहुंचा मामला
आरटीआई कार्यकर्ता प्रशस्ति उपाध्याय ने बताया कि डाक द्वारा डीएम और प्रमुख सचिव से मामले की शिकायत की गई है। ऑडिट टीम अपनी रिपोर्ट में अनियमितता की बात कह चुकी है। इसके बाद भी अब तक अधिशाषी अधिकारी और पूूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।