सिद्धार्थनगर। पूर्वांचल के लिए सिरदर्द बने कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह की बागपत जेल में सुनील राठी द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने की सूचना के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। शासन के निर्देशानुसार, डीएम और एसपी ने सोमवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। जेल में बंद टॉप टेन अपराधियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जिला जेल पश्चिमी यूपी का माफिया योगेश भदौड़ा भी दो साल से बंद है। उसकी बैरक की भी सघनता से जांच की गई।
जिला जेल नेपाल सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां नेपाल से लेकर यूपी के बड़े माफिया बंद रहे हैं। वैसे तो यहां जेल में कभी बवाल नहीं हुआ, लेकिन अक्तूबर 2009 में सुरंग बनाकर तीन कैदी जेल से भाग निकले थे। हालांकि जल्द ही इन्हें पकड़ लिया गया था। जिला जेल में कुख्यात योगेश भदौड़ा दो वर्षों से बंद है। उसकी प्रतिद्वंद्वी गीतांजली भी इस जेल में रह चुकी है। बाद में सुरक्षा के मद्देनजर उसे दूसरे जेल में भेज दिया गया। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद से जेल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कैदियों के साथ ही मुलाकातियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। छानबीन के बाद ही उन्हें मिलने की इजाजत दी जा रही है।
पेशी पर जाते समय भाग निकला था साबिर
पश्चिमी यूपी, हरियाणा व दिल्ली में लूट, हत्या व रंगदारी मांगने के मामले में मुकीम काला गैंग का कुख्यात साबिर को भी जिला जेल में रखा जा चुका है। नवंबर 2017 में हरियाणा के एक कोर्ट में पेशी पर जाते समय साबिर बाराबंकी से फरार हो गया था। इस साल तीन जनवरी की रात मुठभेड़ मेें पुलिस ने एक लाख के इनामी साबिर को मार गिराया था।
अतीक अहमद भी काट चुका है सजा
वर्ष 2010 में कानपुर, हरदोई सहित राजधानी में लूट, हत्या, रंगदारी जैसे अपराध करने वाले गैंग का सरगना अतीक अहमद भी जिला कारागार में रह चुका है। पेशी के दौरान वीआईपी सुविधा देने के मामले में जिले के असरफुलऐन सिद्दीकी नाम के दरोगा पर कार्रवाई हुई थी।
काफी कम है बंदी रक्षकों की संख्या
- जेल सूत्रों की माने तो जिला कारागार में कैदियों व बंदियों की क्षमता 500 है और वर्तमान में करीब 600 लोग बंद हैं। मगर सुरक्षा कर्मियों के 100 पदों के सापेक्ष 50 ही तैनात हैं। होमगार्डों के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है।
- कारागार में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक नहीं है। संगीन अपराध मेें बंद कैदियों पर नजर रखी जा रही है।
- राजेश सिंह, जेल अधीक्षक