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मौत से पहले माता- पिता से बात करना चाहती थी अंजली

Thu, 23 May 2019 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। शिक्षिका अंजलि यादव मौत से पहले माता और पिता से बात करना चाहती थी। 21 मई को शाम करीब चार बजे अंजलि ने घर पर फोन भी किया था। इस दौरान बहन से बात करते समय वह बहुत रो रही थी। रोते-रोते ही उसने फोन भी काट दिया था। पुलिस सूत्रों मुताबिक अंजलि की मौत फोन करने के कुछ ही देर बाद अर्थात करीब चार बजकर पांच मिनट से चार दस के बीच हुई। फिलहाल मोहाना पुलिस और स्वाट टीम मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुईं हैं।
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मोहाना कस्बे के नौगढ़ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गौहनिया में जालौन जिले के हुसैपुरा सुरई गांव निवासी अंजलि (27) बतौर शिक्षिका तैनात थी। कस्बे के ही एक व्यक्ति के यहां किराए पर कमरा लेकर रहती थी। मंगलवार (21 मई) शाम उसकी मौत हो गई। उसके पैर तार से और गला जंजीर से बंधा था। जबकि हाथ खुले थे। हालात देखने के बाद यह लगा रहा था कि उसे बांधकर जला दिया गया है। पर, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा कि आखिरी जलाने या फिर में किसी शख्स की चीख अवश्य निकलेगी। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। कमरे में सारा सामान सही ढंग से रखा मिला है। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है। कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 22 मई को पोस्टमार्टम के बाद शव अंजलि के घरवालों को सौंप दिया गया।

हर आंख नम, हर जुबां सिर्फ यादे
उरई-रामपुरा। सिद्धार्थ नगर में जनपद के गांव हुसेपुरा तुरोई गांव की शिक्षिका अंजलि की बर्बरता पूर्वक हुई हत्या की खबर जिसने भी सुनी उसके रोंगटे खड़े हो गए। फिर एक पल को एहसास करें कि उन लोगों का क्या हाल हुआ होगा कि जिन्होंने कभी अंजलि को आंगन में खिलखिलाते हुए देखा तो कभी रात को बिजली जाने पर लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते पाया। इन लोगों में अंजलि की बूढ़ी मां सावित्री और चार बहनें मनीषा, बेबी, रुपाली और मनोरमा शामिल है। अंजलि इनमें से चौथे नंबर की थी। आंखों में आंसुओं का सैलाब और चेहरे पर खौफ के भाव लिए घर के एक कोने में खामोश बैठी अंजलि की मां और बहनों को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि जिस अंजलि की फोन पर आने वाली प्यारी सी आवाज ही सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट छोड़ जाती थी, वह अंजलि इस तरह बिना कुछ कहे सुने इस दुनिया को ही हमेशा के लिए छोड़कर चली गई।
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इतनी निर्ममता से तो कोई दुश्मन को भी न मारे
घर के एक खंभे में सिर टिका कर बैठी अंजलि की मां सावित्री सिर्फ इतना ही कह रही थी कि हाय नन्हीं सी मोड़ी को किस बेदर्दी से मारो है, इतनी निर्ममता से तो कोई अपने दुश्मन को भी न मारे। मोड़ी माचिस से भी जल जाती थी, उसके मुंह से चीख निकल पड़ती थी। जालिमों ने तो उसे सिर से पांव तक जला दिया। हाय बिटिया कितनी चीखी चिल्लाई होगी, किसी ने भी उनकी आवाज नहीं सुनी।

खून से नहीं मेहंदी से रचे होते दीदी के हाथ
बहन मनीषा, बेबी और रुपाली ने बताया कि अंजलि की गोद भराई दिसंबर में हुई थी, और बीती 6 मई को ही उसकी शादी झांसी के पूछ क्षेत्र निवासी इंजीनियर हेमंत से होनी थी, शादी की घर पर लगभग सभी तैयारी हो गई थी। अंजलि अपने लिए खरीददारी भी कर चुकी थी और उरई से लाल रंग का लहंगा भी बुक कर लिया था लेकिन ऐन वक्त पर उसकी ड्यूटी चुनाव में लग गई। जिस कारण शादी टालनी पड़ी। फिलहाल शादी की कोई नई तारीख नहीं निकल पाई थी। घर आने के बाद ही आगे का कार्यक्रम तय होना था। छोटी बहन मनोरमा के मुताबिक यदि 6 मई को दीदी की शादी हो जाती तो आज उसके हाथों में खून नहीं बल्कि मेहंदी रची होती।

आईएएस बनना चाहती थी गांव की बिटिया
अंजलि के पिता अजय यादव सामान्य व्यक्ति रहे हैं, उनके पास सात आठ बीघा खेती है और एक मेडिकल स्टोर था, जो कि अब बंद हो चुका है। पांच पांच बेटियां होने के बाद भी अजय कभी परेशान नहीं रहे, वे अपने नाते रिश्तेदारों से यही कहते थे, उनके पांच बेटी नहीं बल्कि बेटे हैं। घर पर मौजूद नाते रिश्तेदारों ने बताया कि अंजलि पढ़ने में बहुत तेज थी। हाईस्कूल और इंटर में वह अपने कुठौंद स्थित कालेज में अव्वल आती थी। इस बार होली पर जब वह आई थी तो बता रही थी कि उसने सिद्धार्थनगर में ही आईएएस की तैयारी भी शुरू कर दी है।
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