सिद्धार्थनगर। बढ़नी-इटवा मार्ग पर तकियवा गांव के पास मंगलवार सुबह हुए परीक्षार्थियों से भरी बोलेरो पलटने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती ग्रामीण जनता लघु माध्यमिक विद्यालय परसा की दो छात्राओं की आंखों में हादसे का खौफ और दहशत साफ झलक रही थी। हादसे में घायल ललिता और मधु विश्वकर्मा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डबडबाई आंखों और कांपते होठों से उन्होंने मौका-ए-वारदात की दास्तां सुनाई तो हर कोई सिहर उठा। छात्राओं का कहना था कि बोलेरो की रफ्तार बहुत तेज थी। प्रधानाचार्य के बार-बार टोकने, मना करने के बाद भी चालक ने रफ्तार कम नहीं की।
अस्पताल में भर्ती ललिता ने बताया कि सुबह पांच बजे हम सभी बोलेरो से परीक्षा केंद्र के लिए निकले। सब बेहद खुश थे। गणित की पढ़ाई अच्छी हुई थी इसलिए पेपर भी अच्छा होने की पूरी उम्मीद थी। इसी पर चर्चा करते हुए हम आगे जा रहे थे। रीना अगली सीट पर प्रिंसिपल सर के साथ थी जबकि बीच वाली सीट पर वह सरिता, मधु, रवींद्र सर और नीतू बैठी थीं। चारों लड़के पीछे थे। प्रिंसिपल सर हम लोगों को पेपर हल करने के टिप्स दे रहे थे। बोलेरो की रफ्तार ज्यादा थी। प्रिंसिपल सर बार-बार चालक को धीमे चलने के लिए कह रहे थे लेकिन वह यह कहते हुए टाल रहा था कि बच्चों को छोड़कर उसे कहीं और जाना है। अचानक गाड़ी के सामने एक सियार आ गया। उसे बचाने के लिए चालक ने ब्रेक लगाया तभी तेज आवाज के साथ टायर फट गया।
जब तक हम लोग कुछ समझ पाते सात चक्कर लेते हुए बोलेरो सड़क किनारे पलट गई। इसके बाद चालक गेट से कूदकर भागने लगा। मेरा हाथ सीट के नीचे दब गया था जिससे बाहर नहीं आ सकी। बाद में लोगों ने बाहर निकाला। प्रिसिंपल सर का सिर बोलेरो में दब गया था। खून निकल रहा था।वहीं, डरी-सहमी मधु विश्वकर्मा का कहना था कि वाहन के एक चक्कर घूमते ही वह बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश आया तो सामने प्रिंसिपल सर खून से लथपथ मृत पड़े थे। उनका सिर गाड़ी में दबा हुआ था। उन्हें देखकर फिर बेहोश हो गई। जब होश आया तो अस्पताल में थी। छात्राओं का कहना था कि एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।
दोपहर तक हादसे से बेखबर रहे डीआईओएस, कहा- 40 किमी दूर नहीं हो सकता परीक्षा केंद्र
सिद्धार्थनगर। परीक्षार्थियों से भरी बोलेरो के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सुबह 10 बजे तक पूरे जिले में फैल चुकी थी। हर तरफ इस हृदयविदारक हादसे की चर्चा थी। अफसोस कि उन्हें ही इसकी खबर नहीं थी जिनके महकमे से जुड़ा मामला था। शाम चार बजे डीआईओएस से फोन पर संपर्क किया गया तो वह घटना के बारे में सुनकर चौंके। पहली प्रतिक्रिया थी कि यह सब कब, कैसे और कहां हुआ। पूरे मामले की जानकारी देने के बाद जब उनसे 40 किमी दूर परीक्षा केंद्र बनाने का जवाब मांगा गया तो उनका कहना था कि ऐसा नहीं हो सकता। कोई भी केंद्र 10-12 किलोमीटर से दूर नहीं भेजा गया है। जरूर छात्र-छात्राओं ने किसी अन्य विद्यालय से फॉर्म भरा होगा। रिकॉर्ड देखकर ही बता पाएंगे। दुर्घटना के कारण जिन विद्यार्थियों की परीक्षा छूटी, उनका क्या होगा, इस बाबत उनका कहना था कि बोर्ड को अवगत कराया जाएगा। वहां से निर्देश मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
हादसे में ये हुए जख्मी
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के खरिकौरा गांव निवासी व ग्रामीण जनता लघु मा. विद्यालय परसा के शिक्षक रवींद्र त्रिपाठी (45), छात्रा खरिकौरा निवासी ललिता त्रिपाठी (17), चनई निवासी नीतू चौधरी (16), बोहली निवासी मधु विश्वकर्मा (17), झिंगहा निवासी छात्र श्यामू (18), योगेंद्र (16), श्रीराम चौधरी (17), रामनरेश (16)।
सात की क्षमता, सवार थे 12 लोग
सिद्धार्थनगर। बढ़नी-इटवा मार्ग पर तकियवा गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई बोलेरो में सात लोगों को बैठाने की क्षमता थी। इसमें एक सीट ड्राइवर के लिए भी थी। मगर, ड्राइवर समेत कुल 12 लोग सवार थे। एआरटीओ कार्यालय के मुताबिक वर्ष 2008 में खरीदी गई बोलेरो ढेबरुआ थाना क्षेत्र के रेड़वरिया निवासी फैजान के नाम पर पंजीकृत है। इसका परमिट सवारी ढोने के लिए नहीं है। सिर्फ निजी उपयोग के लिए चलाया जा सकता है। वाहन का फिटनेस 14 अप्रैल, 2018 तक के लिए है।