सिद्धार्थनगर। जिला भ्रूण हत्या और लिंगानुपात के मामले में काफी संवेदनशील है। इसे गंभीरता से लेते हुए पिछले दिनों पांच सदस्यीय टीम ने आल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की थी। जांच में पाया गया कि भ्रूण हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। छानबीन में आल्ट्रासाउंड केंद्रों की भूमिका संदिग्ध मिली। जांच टीम ने दो आल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सीज कर दिया था। इसके बाद से जिले के 25 आल्ट्रासाउंड संचालक ताला बंद कर फरार हो गए हैं।
24 अप्रैल को हुई थी जांच
भ्रूण हत्या के बढ़ते मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने जिले में जांच के आदेश दिए हैं। 24 अप्रैल को पांच सदस्यीय टीम ने जिले के आल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की थी। टीम में तत्कालीन एसडीएम सदर डॉ. महेंद्र कुमार व तत्कालीन तहसीलदार शोहरतगढ़ नंद प्रताप मौर्य व लखनऊ के तीन अधिकारी शामिल थे। जांच में सिद्धार्थ आल्ट्रासाउंड केंद्र और राज डायग्नोस्टिक सेंटर में काफी गड़बड़ियां मिली थीं। दोनों को सीज कर दिया गया था।
डीएम के निर्देश पर बनी जांच कमेटी
पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने अपने स्तर से जांच कमेटी बनाकर आल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के लिए अलग से टीम बनाई थी। इस टीम की ने जिले के 25 अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों की मौजूदगी की रिपोर्ट दी थी। इसके बाद से इन केंद्रों के संचालक ताला बंद कर फरार हैं। इन आल्ट्रासाउंड केंद्रों को सीज करने की तैयारी चल रही है।
पीएम और सीएम का क्षेत्र भी संवेदनशील
अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन और लिंगानुपात की दृष्टि से प्रदेश के अतिसंवेदशीन 30 जिलों में पीएम और सीएम का क्षेत्र भी शामिल है। अतिसंवेदनशील जिलों में अलीगढ़, बलिया, कानपुर, मिर्जापुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, फिरोजाबाद, हापुड़, फैजाबाद, आगरा, मुरादाबाद, अमरोहा, गाजियाबाद, बागपत, हमीरपुर, गौतमबुद्धनगर, रामपुर, पीलीभीत, शामली, वाराणसी, हाथरस, फर्रूखाबाद, गोरखपुर, मथुरा, प्रतापगढ़, मेरठ, बुलंदशहर, कन्नौज, सिद्धार्थनगर व बरेली शामिल हैं।
शुरू होगी जांच
प्रभारी सीएमओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच का आदेश मिला है। दो अल्ट्रासाउंड केंद्र सीज किए गए हैं। अन्य केंद्रों की भी जांच की जाएगी।